Mahabharat Katha: महाभारत युद्ध के दौरान भीम ने पिया अपने भाई का खून, पढ़ें द्रौपदी के अपमान की प्रतिशोध गाथा
punjabkesari.in Wednesday, Feb 25, 2026 - 09:13 AM (IST)
Mahabharat Katha: भारतीय महाकाव्य महाभारत में वर्णित कुरुक्षेत्र का युद्ध केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि प्रतिज्ञाओं और प्रतिशोध की भी कहानी है। युद्ध के 16वें दिन एक ऐसा घटना क्रम हुआ जिसने पूरे रणभूमि को हिला दिया। पांडवों में बलशाली भीम ने कौरवों के प्रमुख योद्धा दुशासन का वध कर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की।

क्यों क्रोधित थे भीम?
कुरुक्षेत्र के युद्ध में भीम पहले ही दुर्योधन के कई भाइयों का वध कर चुके थे, लेकिन उनके मन में सबसे अधिक आक्रोश दुशासन के प्रति था। इसकी वजह थी द्रौपदी का अपमान।
चौपड़ के खेल में पांडवों के पराजित होने के बाद, दुशासन ने दुर्योधन के आदेश पर द्रौपदी को भरी सभा में बाल पकड़कर घसीटा और चीर हरण का प्रयास किया। उस अपमानजनक घटना ने पांडवों के हृदय में प्रतिशोध की ज्वाला जला दी।

16वें दिन का भीषण द्वंद्व
महाभारत की कथा के अनुसार, युद्ध के 16वें दिन भीम और दुशासन आमने-सामने आए। भीम का क्रोध चरम पर था। उन्होंने गरजते हुए घोषणा की कि आज वह अपनी प्रतिज्ञा अवश्य पूरी करेंगे।
भीषण युद्ध के बाद भीम ने दुशासन को रणभूमि में परास्त कर जमीन पर पटक दिया। इसके बाद उन्होंने उसका सीना चीर दिया। कथा के अनुसार, भीम ने दुशासन के हृदय से निकला रक्त पिया और कहा कि अब उनका प्रण पूर्ण हुआ।
द्रौपदी की प्रतिज्ञा भी हुई पूर्ण
इस घटना के बाद भीम दुशासन का रक्त लेकर द्रौपदी के पास पहुंचे। द्रौपदी ने पहले ही प्रण लिया था कि जब तक वह अपने अपमान का बदला नहीं लेंगी, तब तक अपने बाल नहीं बांधेंगी।
कथा के अनुसार, द्रौपदी ने दुशासन के रक्त से अपने बालों को स्पर्श कर अपनी प्रतिज्ञा पूरी की। यह क्षण महाभारत युद्ध का एक अत्यंत भावनात्मक और निर्णायक प्रसंग माना जाता है।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
यह प्रसंग धर्म और अधर्म की लड़ाई का प्रतीक है। महाभारत में भीम का यह कृत्य केवल प्रतिशोध नहीं, बल्कि उस अन्याय के विरुद्ध न्याय की स्थापना के रूप में देखा जाता है। युद्ध के 16वें दिन की यह घटना दर्शाती है कि अपमान और अधर्म का अंत निश्चित है, चाहे समय कितना भी क्यों न लगे।
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Content Writer
Niyati Bhandari