Adi Shankaracharya Jayanti 2026 : कौन थे सनातन धर्म के मास्टर माइंड शंकराचार्य, जानें कैसे चार धाम बनाकर जोड़ा पूरा भारत एक आध्यात्मिक धागे में

punjabkesari.in Monday, Apr 20, 2026 - 03:37 PM (IST)

Adi Shankaracharya Jayanti 2026 : हिंदू धर्म में शंकराचार्य जयंती को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आता है। इस बार आदि शंकराचार्य जयंती 21 अप्रैल को मनाई जाएगी। इस दिन उनकी 1238वीं जयंती होगी। शंकराचार्य को सनातन धर्म का मास्टर माइंड भी कहा जाता है। माना जाता है कि उन्हें ने हिंदू संस्कृति को तब संभाला था, जब हिन्दु संस्कृति पूरी तरह खत्म होने की कगार में था। इन्हें उस समय अपने मास्टर माइंड दिमाग से अलग-अलग दिशाओं में चार पीठों की स्थापना की इन मठों के माध्यम से उन्होंने धर्म, शिक्षा और आध्यात्मिकता को पूरे भारत में फैलाया। तो आइए जानते हैं कि कैसे चार धाम बनाकर शंकराचार्य ने भारत को एक आध्यात्मिक धागे में जोड़ा। 

Adi Shankaracharya Jayanti 2026

कौन थे आदि शंकराचार्य?
सनातान धर्म में आदि शंकराचार्य का बहुत खास स्थान है। आदि शंकराचार्य 8वीं शताब्दी के महान दार्शनिक थे। माना जाता है कि उनका जन्म कालड़ी गांव में हुआ था, जो केरल में स्थित एक छोटा सा गांव है। उनके पिता का नाम शिवगुरु और माता का नाम आर्याम्बा था। कहा जाता है कि छोटी सी उम्र में ही वे संन्यासी बन गए थे और ज्ञान की खोज में भारत की चार दिशाओं में अपनी यात्रा की और लोगों तक अपने विचारों को पहुंचाने में सफल भी रहे। इनके बारे में ये भी कहा जाता है कि इन्हें मात्र 8 साल की आयु में ही अपनी तेज बुद्धि से वेदों का ज्ञान प्राप्त कर लिया था। 

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आदि शंकराचार्य ने चारों दिशाओं में क्यों की मठों की स्थापना
माना जाता है कि उस समय लोगों के बीच भेद-भाव की भावना और भ्रम फैसा हुआ था। लोग कई सारे मतों में बटे हुए थे और वेदों की सही जानकारी भी लोगों तक अच्छे से नहीं पहुंची थी। इस समस्याओं को दूर करने के लिए आदि शंकराचार्य ने चार अलग-अलग दिशाओं में चार मठों की स्थापना की थी। इन मठों की स्थापना करने का मुख उदेश्य केवल धार्मिक केंद्र बनाने ही नहीं था, बल्कि सनातन धर्म की रक्षा, संगठन और ज्ञान के प्रसार के लिए ये कदम उठाया गया था। 

चार प्रमुख मठ
इन मठों का उद्देश्य धर्म और ज्ञान का प्रचार करना था। इन्हीं चार मठों की स्थापना के बाद ही यह परंपरा चार धाम यात्रा के रूप में प्रसिद्ध हुई, जो आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। आज भी ये मठ सनातन परंपरा के महत्वपूर्ण केंद्र माने जाते हैं।
श्रृंगेरी मठ (दक्षिण – कर्नाटक)
द्वारका मठ (पश्चिम – गुजरात)
पुरी मठ (पूर्व – ओडिशा)
ज्योतिर्मठ (बद्रीनाथ) (उत्तर – उत्तराखंड)

Adi Shankaracharya Jayanti 2026

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Content Editor

Sarita Thapa

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