Purushottam Maas 2026: 15 जून तक शुभ कार्यों पर ब्रेक और वर्जित हैं शादियां, जानें क्या है इसका वैज्ञानिक व धार्मिक रहस्य
punjabkesari.in Tuesday, May 19, 2026 - 11:05 AM (IST)
Adhik Maas 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 धार्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण होने जा रहा है। इस साल 12 की जगह 13 महीने होंगे, क्योंकि 17 मई 2026 से मलमास (अधिक मास) का शुभारंभ हो रहा है, जो 15 जून 2026 तक चलेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस 30 दिनों की अवधि में विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर पूरी तरह से 'नो एंट्री' रहेगी।

How Was Purushottam Maas Formed? कैसे बना पुरुषोत्तम मास?
खर (मल) मास को भगवान पुरुषोत्तम ने अपना नाम दिया है। इसलिए इस मास को पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। खर मास, यानी खराब महीना, वह महीना जब हर प्रकार के शुभ काम बंद हो जाते हैं। कोई नया काम शुरू नहीं किया जाता।
Scientific Reason Behind Mal Mas मल मास का वैज्ञानिक कारण
मल मास पुरुषोत्तम मास, अधिक मास या अधिमास के नाम से भी जाना जाता है। सामान्यतः अधिक मास 32 महीने 16 दिन और 4 घड़ी के अंतर से आता है। ग्रंथों में प्रति 28 मास के पश्चात और 36 मास से पहले अधिक मास होने की बात कही गई है। वर्ष के 12 महीनों में सूर्य क्रम से 12 राशियों (मेष से मीन राशि तक) पर आता है। अधिक मास में सूर्य का किसी राशि पर संक्रमण नहीं होता, इसी कारण यह एक माह अलग ही रह जाता है। अलग रह गए इसी माह को अधिक मास कहा जाता है। कहा गया है कि जिस मास में सूर्य का किसी राशि पर संक्रमण न हो वह अधिकमास और एक ही मास में दो संक्रांति हों तो वह क्षयमास कहलाता है।

What To Do Or Not To During malmas: मलमास में क्या करें क्या न करें
मलमास में क्या न करें
विवाह की बातचीत, विवाह की मौखिक सहमति, पहले से शुरू कार्यों का समापन, प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री, वाहन बुकिंग, बयाना, सरकारी कार्य, पढ़ाई, शिक्षा का एडमिशन आदि। कोई भी नई वस्तुएं जैसे घर, कार इत्यादि न खरीदें। गृह निर्माण कार्य शुरू न करें और न ही उससे संबंधित कोई सामान खरीदें। कोई भी शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, सगाई मुंडन व नए कार्य प्रारंभ नहीं करने चाहिए।
मलमास में करें ये उपाय
मेष- भगवान श्री हरी विष्णु का केसर मिले दूध से अभिषेक करें, संभव हो तो दक्षिणावर्ती शंख में डालकर करें।
वृष- रविवार को छोड़कर अन्य 6 दिन सुबह पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं और सूर्यास्त पर तेल का दीपदान करें।
मिथुन- एक महीने तक हर रोज कम से कम एक माला श्री विष्णु सहस्त्रनाम् में दिये गए इस मंत्र का जाप करें। मंत्र- यस्य स्मरण मात्रेन जन्म संसार बन्धनात्। विमुच्यते नमस्तमै विष्णवे प्रभविष्णवे ॥
कर्क- ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को घर में कंजक पूजन करें, छोटी कन्याओं को दूध और चावल से बनी खीर खिलाएं और उपहार दें। घर में संभव न हो तो घर के बाहर कंजकों को खीर और उपहार भेंट कर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें।
सिंह- एक महीने तक हर रोज श्री हरी विष्णु के मन्दिर जाएं, संभव हो तो अधिक से अधिक धार्मिक यात्राएं करें। घर के मंदिर और तुलसी के पास सुबह-शाम चिल के तेल का दीपक जलाएं।
कन्या- हर रोज सुबह शुद्ध होकर 108 बार श्री विष्णु सहस्त्रनाम में दिए गए इस मंत्र का जाप करें। मंत्र- नमः समस्त भूतानां आदि भूताय भूभृते। अनेक रुप रुपाय विष्णवे प्रभविष्णवे॥
पुरुषोत्तम मास में इस मंत्र का हर रोज जाप करना शुभ फल देगा। मंत्र- गोवर्धन धरं वन्दे गोपालं गोपरुपिणं। गोकुलोत्सव मीशानं गोविन्द गोपिकाप्रियं।।
तुला- श्री विष्णु के साथ उनकी प्राणप्रिया लक्ष्मी जी की भी आराधना करें। हर रोज मंदिर जाकर इस मंत्र का जाप। संभव न हो तो घर के मंदिर में बैठकर भी कर सकते हैं मंत्र- ‘श्रीं ह्रीं श्रीं’
वृश्चिक- पुरुषोत्तम मास में आने वाली दोनों एकादशी को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दूध और फल का दान करें। दान करना संभव न हो तो व्रत रखें।
धनु- श्री विष्णु सहस्त्रनाम् में बताए गए भगवान विष्णु के इस मंत्र का जाप करें। मंत्र- जगत्प्रभुं देव देव मनन्तं पुरुषोत्तमम्। स्तुवन् नाम सहस्त्रेण पुरुषः सत तोत्थितः।।
मकर- हर रोज श्री हरी विष्णु के सामने बैठकर गायत्री मंत्र का पाठ करें। मंत्र- ॐ भूर्भुव स्वः। तत् सवितुर्वरेण्यं। भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥
कुंभ- सुबह तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और शाम को गाय के शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
मीन- भगवान पुरुषोत्तम के इस मंत्र का जाप करें। मंत्र- ईशानः प्राणदः प्राणो ज्येष्ठः श्रेष्ठः प्रजापतिः। हिरण्यगर्भो भूगर्भो माधवो मधुसूदनः।।
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