AGR मामलाः SC की कंपनियों और सरकार को फटकार, क्या हम कोर्ट को बंद कर दें?

punjabkesari.in Friday, Feb 14, 2020 - 01:25 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः सुप्रीम कोर्ट शुक्रवार को एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) के संबंध में टेलीकॉम कंपनियों की ओर से दाखिल की गई नई याचिका पर सुनवाई में इन कंपनियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है कि 23 जनवरी 2020 डेडलाइन होने के बावजूद टेलीकॉम कंपनियों ने बकाया क्यों नहीं चुकाया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दूरसंचार अधिकारी, एयरटेल और वोडाफोन ने कोर्ट का आदेश ना मानकर उसकी अवमानना की है। कोर्ट ने कंपनियों को बकाया चुकाने के लिए 17 मार्च तक का वक्त दिया है। 17 मार्च को अगली सुनवाई होनी है।

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कोर्ट ने अपने फैसले में टेलीकॉम ऑपरेटर्स को आदेश दिया है कि कि अगली सुनवाई तक वो बकाया चुका दें। कोर्ट ने कहा कि हर तरह के भ्रष्टाचार पर रोक लगाना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर में टेलीकॉम ऑपरेटर्स को 1.33 लाख करोड़ रुपए का बकाया चुकाने के लिए उनको 23 जनवरी तक का वक्त दिया था, जो कब का गुजर चुका है।

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क्या कहा कोर्ट ने
जस्टिस अरुण मिश्रा ने याचिकाओं पर नाराजगी जताते हुए कहा, 'ये याचिकाएं दाखिल नहीं करनी चाहिए थीं। ये सब बकवास है। क्या सरकारी डेस्क अफसर सुप्रीम कोर्ट से बढ़कर है जिसने हमारे आदेश पर रोक लगा दी। अभी तक एक पाई भी जमा नहीं की गई है। हम सरकार के डेस्क अफसर और टेलीकॉम कंपनियों पर अवमानना की कार्रवाई करेंगे। क्या हम सुप्रीम कोर्ट को बंद कर दें? क्या देश में कोई कानून बचा है? क्या ये मनी पॉवर नहीं है?'

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सुप्रीम कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि इस प्रकार की मोहलत मांगने वाली याचिका दाख‍िल ही नहीं करनी चाहिए थी। ये सब शोर-शराबा कौन कर रहा? सुप्रीम कोर्ट ने कहा-' हम इस मामले में बहुत कड़े शब्दों का इस्तेमाल करना चाहते हैं। यह पूरी तरह से बेवकूफी है जो कहना था हमने कह दिया। आपको पैसा चुकाना ही होगा।'

इसके पहले ऑपरेटर्स की ओर से अक्टूबर के फैसले के खिलाफ एक याचिका डाली गई थी, जिसमें कोर्ट से आग्रह किया गया था कि वो अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और उन्हें किसी भी तरह की राहत दे लेकिन कोर्ट ने 17 जनवरी को उनकी याचिका पर सुनवाई के बाद इसे खारिज करके अपना अक्टूबर का फैसला बरकरार रखा था। अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया था कि टेलीकॉम कंपनियां सरकार को AGR देगी।

इसके बाद टेलीकॉम कंपनियों की ओर से दूसरी याचिका दाखिल की गई है, जिसमें उन्होंने अब यह पेमेंट करने के लिए ज्यादा वक्त मांगा है। इसके पहले Bharti Airtel  और Vodafone-Idea DoT (Department of Telecom) को चिट्ठी लिखकर आग्रह भी किया था कि वो उनकी नई याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के पहले कोई एक्शन न लें, जिसके बाद सरकार ने सुनवाई तक इंतजार करने का फैसला किया है।

क्या है पूरा विवाद?
टेलीकॉम सेक्टर के एडजेस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू की परिभाषा पर विवाद था। कंपनियां नॉन कारोबार रेवेन्यू शेयरिंग नहीं करती थीं। DoT  ने बाकी कारोबार में रेवेन्यू शेयिरंग मांगी थी। 2005 से ही ये मामाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। CAG रिपोर्ट से सरकार को भारी नुकसान हो रहा था। DoT के स्पेशल ऑडिट ने मांग को सही ठहराया था। सरकार ने कंपनियों को नोटिस भेज कर रकम मांगी थी लेकिन कंपनियों ने सरकार के फैसले को अदालत में चुनौती दी।

इन कंपनियों पर है बकाया
Bharti Airtel पर 26 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का बकाया है। vodafone-idea पर 19000 करोड़ रुपए से ज्यादा का बकाया है जबकि Reliance Communication पर 16000 करोड़ रुपए का बकाया है। वहीं BSNL का 2 हजार करोड़ रुपए जबकि MTNL का 2500 करोड़ रुपए का बकाया है।

 


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jyoti choudhary

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