क्या अधूरा रह जाएगा सचिन पायलट के सीएम बनने सपना? भारी पड़ेगा गहलोत का ये दांव

punjabkesari.in Thursday, Nov 24, 2022 - 08:43 PM (IST)

नेशनल डेस्कः राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा महाराष्ट्र से निकलकर मध्य प्रदेश में प्रवेश कर चुकी है। यात्रा का अगला पड़ाव राजस्थान है लेकिन भारत जोड़ो यात्रा से पहले राज्य में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और सचिन पालयट के बीच की बगावत खुलकर सामने आ गई है। राजस्थान के मुख्यमंत्री ने यह कहकर कांग्रेस में नए विवाद को जन्म दे दिया है कि सचिन पायलट ‘गद्दार' हैं। उन्होंने 2020 में पार्टी के खिलाफ बगावत की थी और गहलोत नीत सरकार गिराने की कोशिश की थी इसलिए उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जा सकता। गहलोत के इस बयान ने कांग्रेस के सामने नई मुसीबत खड़ी कर दी है। दरअसल, राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं और दोनों नेताओं की कलह कांग्रेस के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।

गहलोत क्यों हैं पायलट से नाराज
दरअसल, बात साल 2020 की है। देश में कोरोना की लहर चल रही थी। इस बीच, राजस्थान में सियासी उठापटक तेज हो गई। तत्कालीन डिप्टी सीएम सचिन पायलट 19 विधायकों के साथ गुरुग्राम के एक रिसॉर्ट पहुंच चुके थे। अशोक गहलोत ने भी बाकी विधायकों को रायपुर भेज दिया। सचिन पायलट अपने विधायकों के साथ करीब एक हफ्ते तक रिजॉर्ट में रुके थे। गहलोत ने आरोप लगाया कि जब पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस के कुछ विधायक गुरुग्राम के एक रिसॉर्ट में एक महीने से अधिक समय तक रहे थे, तब इस बगावत में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की भी भूमिका थी।

राजस्थान के मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनके पास इस बात का सबूत है कि पायलट समेत प्रत्येक विधायक को 10-10 करोड़ रुपये दिए गए थे। कई हफ्तों तक चली खींचतान के बाद अंत में गहलोत अपनी सरकार बचाने में सफल हुए। नए मंत्रिमंडल का गठन हुआ, जिसमें सचिन पायलट को डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया। पायलट गुट के विधायकों को भी मंत्रीपद से इस्तीफा देना पड़ा।

अजय माकन, रणदीप सुरजेवाला को सौंपी थी जिम्मेदारी
कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता अजय माकन और रणदीप सिंह सुरजेवाला को पर्यवेक्षक बनाकर राजस्थान भेजा। माकन और सुरजेवाला ने राजस्थान जाकर कमान संभाली। इधर, दिल्ली में पार्टी के महासचिव मुकुल वासनिक लगातार सोनिया गांधी को पल-पल की अपडेट दे रहे थे। दोनों नेताओं ने पार्टी हाईकमान की बात राजस्थान नेतृत्व के सामने रखी। इस दौरान पायलट अपने गुट के साथ रिसॉर्ट में मौजूद थे। उनसे पार्टी के वरिष्ठ नेता लगातार संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे। माकन और सुरजेवाला विधायकों को मनाने में सफल रहे। अंत में पायलट भी मान गए और वापस राजस्थान पहुंचे लेकिन गहलोत और उनके बीच दूरियां बनी रहीं।

पायलट की राह कितनी मुश्किल
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अभी सचिन पायलट की बगावत को भूले नहीं हैं। वह गाहे-बगाहे अलग-अलग मंचों से पायलट को निशाना बनाते रहे हैं। गहलोत ने गुरुवार को एक फिर उन्हें गद्दार करार देते हुए कहा कि वो मुख्यमंत्री नहीं बन सकते हैं। गहलोत का दावा है कि पायलट के पास 10 विधायकों का भी समर्थन नहीं है। वो सीएम कैसे बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी आलाकमान चाहे तो 102 विधायकों में से पायलट को छोड़कर किसी को भी उनकी जगह मुख्यमंत्री बना सकता है। गहलोत का कहना है कि पायलट की 2020 में की गई बगावत को भुलाया नहीं जा सकता और उन्हें अधिकतर कांग्रेस विधायकों का समर्थन नहीं है, वहीं पायलट खेमा दावा कर रहा है कि विधायक नेतृत्व परिवर्तन चाहते हैं।

बताते चलें कि राजस्थान में 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर गहलोत और पायलट के बीच गतिरोध रहा है। राजस्थान कांग्रेस में नेतृत्व में संभावित बदलाव को लेकर कानाफूसी चल रही है, लेकिन एक वर्ग इसका विरोध भी कर रहा है। गहलोत ने कहा कि विधायक चाहते हैं कि पायलट कम से कम पार्टी आलाकमान से और राजस्थान की जनता से माफी मांग लें। उन्होंने उम्मीद जताई कि कांग्रेस आलाकमान राजस्थान के साथ न्याय करेगा।

 

 

 

 


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Content Writer

Yaspal

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