Pregnancy Tourism: इस राज्य के पुरुषों से गर्भवती होना चाहतीं हैं विदेश महिलाएं, जानिए क्या है नया प्रेग्नेंसी टूरिज्म फैशन?
punjabkesari.in Monday, Oct 13, 2025 - 10:27 AM (IST)
नेशनल डेस्क। आपने कई तरह के पर्यटन (टूरिज्म) के बारे में सुना होगा लेकिन क्या कभी 'प्रेग्नेंसी टूरिज्म' (Pregnancy Tourism) जैसा कोई शब्द आपके कानों में पड़ा है? भारत के शांत और सुरम्य क्षेत्र लेह-लद्दाख को लेकर इसी तरह की एक रहस्यमयी और विवादास्पद चर्चा सदियों से होती रही है। कहा जाता रहा है कि यूरोप खासकर जर्मनी की महिलाएं लद्दाख की सुदूर घाटियों में स्थित एक अनोखे समुदाय के शुद्ध आर्य नस्ल के पुरुषों से गर्भवती होने के लिए यहां आती हैं।

कौन हैं लद्दाख के अंतिम आर्य?
लद्दाख की दूर-दराज की घाटियों में एक विशिष्ट समुदाय रहता है जिसे ब्रोक्पा जनजाति (Brokpa Tribe) के नाम से जाना जाता है। ये मुख्य रूप से दाह, हनु, गरकोन और आसपास के कुछ गांवों में रहते हैं।
ये लोग अपनी ऊंची कद-काठी, गोरी त्वचा और हल्के रंग की आंखों के कारण बाकी लद्दाख से अलग दिखते हैं। इनकी शारीरिक विशेषताएँ भारतीय कम और यूरोपीय मूल की ज्यादा लगती हैं। ब्रोक्पा लोग अपनी अनूठी संस्कृति, फूलों से सजे सिर के परिधान और ब्रोक्सकट नामक भाषा के लिए जाने जाते हैं।

'शुद्ध आर्य' की उपाधि
इन्हें अक्सर भारत के अंतिम आर्य कहा जाता है और स्थानीय लोककथाओं में दावा किया जाता है कि ये सिकंदर महान के सैनिकों के वंशज हैं।
क्या है प्रेग्नेंसी टूरिज्म का दावा?
प्रेग्नेंसी टूरिज्म एक ऐसा शब्द है जिसका इस्तेमाल इस अटकलबाजी के लिए किया जाता है कि विदेशी महिलाएं खास तौर पर जर्मन युवतियां ब्रोक्पा गांवों में इस मकसद से आती हैं ताकि वे शुद्ध आर्य नस्ल के पुरुषों से संतान पैदा कर सकें। इन रिपोर्टों में कहा गया है कि ये महिलाएं कथित तौर पर अछूते आर्य वंश के गुणों को अपनी संतानों में लाने में रुचि रखती हैं।
डेक्कन हेराल्ड जैसे समाचार पत्रों ने इस पर रिपोर्टें छापी हैं। इसके अलावा "द आर्यन सागा" जैसी डॉक्युमेंट्री में भी जर्मन महिलाओं के ब्रोक्पा पुरुषों से मिलने की कहानियां हैं। Reddit जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म आज भी इस विषय पर अटकलों से भरे पड़े हैं।

हकीकत क्या है?
सच कहें तो लद्दाख में ऐसे 'सेक्स पर्यटन' या 'गर्भावस्था पर्यटन' की वास्तविकता अब भी साफ नहीं है। इस बात का कोई आधिकारिक दस्तावेज या सत्यापित प्रमाण नहीं है कि ऐसी घटनाएँ कभी किसी बड़े पैमाने पर हुई हों। अधिकांश स्थानीय निवासी और ब्रोक्पा समुदाय के लोग इन कहानियों को सीधे तौर पर खारिज करते हैं। आनुवंशिकीविद (Geneticists) और इतिहासकार भी इस बात को खारिज करते हैं कि ब्रोक्पा लोग 'आर्यों की शुद्ध नस्ल' से जुड़े हैं। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
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क्यों आते हैं पर्यटक?
दाह-हनो जैसे ब्रोक्पा गांव अपनी अनोखी संस्कृति, पारंपरिक पोशाक, त्योहारों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। विदेशी पर्यटक यहाँ आमतौर पर फोटोग्राफी, सांस्कृतिक अध्ययन और ट्रेकिंग के लिए आते हैं।
वास्तविक गर्भावस्था पर्यटन (Birth Tourism)
यह शब्द आमतौर पर उस प्रथा से जुड़ा है जहां गर्भवती माताएं दूसरे देश में बच्चे को जन्म देने के लिए यात्रा करती हैं ताकि बच्चा जन्मस्थान के आधार पर वहां की नागरिकता (Citizenship) पा सके जैसा कि अमेरिका या कनाडा में 'जूस सोली' (Jus Soli - भूमि का अधिकार) के सिद्धांत के तहत होता है। लद्दाख का मामला इस पारंपरिक परिभाषा से बिल्कुल अलग और नस्लीय विवादों से जुड़ा है।
