पश्चिम एशिया युद्ध का भारत पर बड़ा असर: विदेशी मरीजों की कमी से मेडिकल टूरिज्म में 40% की भारी गिरावट
punjabkesari.in Sunday, Mar 29, 2026 - 11:24 AM (IST)
नेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर अब भारत के तेजी से बढ़ते मेडिकल टूरिज्म सेक्टर पर साफ दिखने लगा है। इंडस्ट्री रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे बड़े मेडिकल हब में विदेशी मरीजों की संख्या में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी आई है। इसके साथ ही इस सेक्टर से होने वाली कमाई में भी इसी अनुपात में गिरावट दर्ज की गई है।
दो हफ्तों में हालात और बिगड़े
मेडिकल इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि पिछले दो हफ्तों में स्थिति और गंभीर हो गई है। विदेश से आने वाले मरीजों की संख्या में 50 से 75 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई है। खासतौर पर पश्चिम एशिया से आने वाले मरीजों की संख्या में करीब 75 प्रतिशत की कमी आई है।
सर्विसेज़ एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के डायरेक्टर जनरल डॉ. अभय सिन्हा के अनुसार, इस गिरावट का सीधा असर कमाई पर पड़ा है। कई जगहों पर हर महीने की आय में 15 से 20 प्रतिशत तक की कमी आई है, जबकि कुछ अस्पतालों में यह गिरावट 35 प्रतिशत तक पहुंच गई है। दिल्ली के कुछ अस्पतालों में मेडिकल टूरिज्म से होने वाली आय 30-40 प्रतिशत तक घट गई है।
नए बाजारों की तलाश में अस्पताल
लंबे समय तक असर रहने की आशंका को देखते हुए अस्पताल अब नए देशों और क्षेत्रों की ओर ध्यान दे रहे हैं। अब फोकस दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया (जैसे इंडोनेशिया और श्रीलंका), अफ्रीका (नाइजीरिया, केन्या, मॉरीशस) और मध्य एशिया के देशों पर किया जा रहा है। अब तक भारत में आने वाले कुल विदेशी मरीजों में 18 से 30 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया का रहा है, इसलिए वहां की स्थिति का सीधा असर इस सेक्टर पर पड़ा है।
फ्लाइट रद्द और महंगे टिकट बने बड़ी वजह
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह उड़ानों का रद्द होना और टिकटों की कीमतों में बढ़ोतरी है। भले ही कुछ रूट पर उड़ानें फिर शुरू हो गई हैं, लेकिन किराए में 15 से 25 प्रतिशत तक इजाफा हुआ है, जिससे मरीजों का आना मुश्किल हो गया है।
इन इलाजों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
इस स्थिति का असर खासतौर पर उन इलाजों पर पड़ा है, जिन्हें टाला जा सकता है। इनमें प्लास्टिक सर्जरी, बुजुर्गों का इलाज, हड्डियों से जुड़ी सर्जरी और फर्टिलिटी ट्रीटमेंट शामिल हैं। डॉ. सिन्हा के अनुसार, शुरुआत में असर कम था क्योंकि कई मरीज पहले से बुकिंग कर चुके थे, लेकिन अब नए मरीजों के रजिस्ट्रेशन में भारी गिरावट आ गई है।
दक्षिण भारत में असर थोड़ा कम
दक्षिण भारत के अस्पतालों पर इस संकट का असर अपेक्षाकृत कम पड़ा है। इसकी वजह यह है कि वहां यात्रा के लिए वैकल्पिक हवाई मार्ग उपलब्ध हैं, जिससे कुछ मरीज अभी भी पहुंच पा रहे हैं।
फोर्टिस हेल्थकेयर ने बताए चौंकाने वाले आंकड़े
फोर्टिस हेल्थकेयर के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर अनिल विनायक के मुताबिक, उनके अस्पतालों में अंतरराष्ट्रीय मरीजों का आना लगभग रुक गया है। उन्होंने बताया कि फरवरी के आखिरी 10 दिनों की तुलना में मार्च के पहले 10 दिनों में मध्य-पूर्व से आने वाले मरीजों की संख्या में 75 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।
