9 नहीं, अब 12 महीने की होगी प्रेग्नेंसी! जानें क्या है Trimester Zero जिसे अपना रही हैं आज की महिलाएं?
punjabkesari.in Friday, Mar 20, 2026 - 11:27 AM (IST)
Trimester Zero Pregnancy Concept : अब प्रेग्नेंसी की तैयारी गर्भधारण के बाद नहीं बल्कि उससे तीन महीने पहले ही शुरू हो रही है। इसी शुरुआती फेज को डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स 'ट्राइमेस्टर जीरो' कह रहे हैं। खासकर शहरी इलाकों और कामकाजी कपल्स के बीच यह कॉन्सेप्ट एक 'हेल्थ मंत्र' की तरह लोकप्रिय हो रहा है।
क्या है Trimester Zero का गणित?
आसान शब्दों में कहें तो बच्चा प्लान करने से पहले के 90 दिन या 3 महीने का समय 'ट्राइमेस्टर जीरो' कहलाता है। इस दौरान कपल अपनी डाइट, एक्सरसाइज और मेडिकल चेकअप पर फोकस करते हैं ताकि कंसीव करने में कोई समस्या न आए और होने वाला बच्चा पूरी तरह स्वस्थ हो।
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क्यों जरूरी है यह प्री-प्लानिंग?
आजकल लोग करियर के कारण 30 या 40 की उम्र में पैरेंट बनने का फैसला ले रहे हैं। ऐसे में रिस्क बढ़ जाता है। ट्राइमेस्टर जीरो इन वजहों से अहम है:
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बीमारियों पर कंट्रोल: थायराइड, डायबिटीज या पीसीओएस (PCOS) जैसी समस्याओं को प्रेग्नेंसी से पहले ही पहचान कर काबू किया जा सकता है।
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पोषण और सप्लीमेंट्स: डॉक्टर इस दौरान फोलिक एसिड जैसे जरूरी सप्लीमेंट्स शुरू कर देते हैं जो बच्चे के दिमागी विकास के लिए जरूरी हैं।
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हार्मोनल बैलेंस: लाइफस्टाइल बदलकर शरीर के हार्मोन्स को संतुलित किया जाता है ताकि फर्टिलिटी बेहतर हो सके।
सिर्फ महिला ही नहीं, पुरुषों की भी भागीदारी
पुराने समय में प्रेग्नेंसी की तैयारी सिर्फ महिलाओं की जिम्मेदारी मानी जाती थी लेकिन 'ट्राइमेस्टर जीरो' ने इस सोच को बदला है। अब पुरुष भी अपनी फर्टिलिटी चेकअप करवा रहे हैं और बेहतर स्पर्म क्वालिटी के लिए शराब-सिगरेट जैसी बुरी आदतों को छोड़ रहे हैं।
सोशल मीडिया और अवेयरनेस का असर
इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स पर हेल्थ इन्फ्लुएंसर्स और डॉक्टर्स इस विषय पर खुलकर बात कर रहे हैं। यही वजह है कि अब कपल पहले से ज्यादा जानकारी के साथ क्लीनिक पहुंच रहे हैं और एक 'स्ट्रक्चर्ड' तरीके से फैमिली प्लानिंग कर रहे हैं।
सावधानी भी है जरूरी
एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि 'परफेक्ट प्रेग्नेंसी' के चक्कर में महिलाएं मानसिक दबाव (Stress) न लें।
"हर शरीर अलग होता है। बिना डॉक्टर की सलाह के सख्त डाइट, भारी एक्सरसाइज या सप्लीमेंट्स लेना खतरनाक हो सकता है। तैयारी धीरे-धीरे और मेडिकल गाइडेंस में ही होनी चाहिए।"


