राहुल गांधी पर विशेषाधिकार हनन आया तो क्या हो सकता है? इंदिरा गांधी के साथ भी हो चुका है ऐसा

punjabkesari.in Wednesday, Feb 11, 2026 - 10:54 PM (IST)

नेशनल डेस्कः राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव आने की चर्चा तेज हो गई है, जिससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या उनकी लोकसभा सदस्यता जा सकती है। इसे समझने के लिए पहले जानना जरूरी है कि संसदीय विशेषाधिकार (Parliamentary Privilege) क्या होते हैं और अगर कोई सांसद उनका उल्लंघन करे तो क्या होता है।

संसद के नियमों के मुताबिक, हर सांसद को कुछ विशेष अधिकार मिलते हैं, जैसे— सदन में बोलने की आज़ादी, सिविल मामलों में गिरफ्तारी से सुरक्षा और संसदीय कार्यवाही में हस्तक्षेप से बचाव।

लेकिन इन अधिकारों के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। अगर कोई सांसद सदन में किसी व्यक्ति, संस्था या सरकार पर गंभीर आरोप लगाता है, तो उसे सबूत देना जरूरी होता है। उसे बताना पड़ता है कि जानकारी कहां से ली गई है और संबंधित दस्तावेज सदन में पेश करने पड़ते हैं।

राहुल गांधी का मामला क्यों बना?

ताजा विवाद इसलिए उठा क्योंकि राहुल गांधी ने संसद में अपने भाषण के दौरान एपस्टीन फाइल्स से जुड़ी कुछ बातें कही थीं। सत्ता पक्ष का आरोप है कि राहुल गांधी ने बिना पुख्ता प्रमाण के बयान दिए हैं। इसलिए सरकार मांग कर रही है कि वे अपनी बातों को सत्यापित करें, नहीं तो उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मामला बन सकता है।

विशेषाधिकार हनन लगे तो क्या होगा?

अगर राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव आता है, तो मामला विशेषाधिकार समिति (Privileges Committee) को भेजा जाएगा।

लेकिन फिलहाल 18वीं लोकसभा में यह समिति अभी तक गठित नहीं हुई है। ऐसे में:

  • लोकसभा अध्यक्ष अस्थायी रूप से सांसदों की एक समिति बना सकते हैं।

  • यह समिति पूरे मामले की जांच करेगी।

  • राहुल गांधी से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा।

  • फिर समिति अपनी रिपोर्ट लोकसभा अध्यक्ष को सौंपेगी।

  • रिपोर्ट सदन में पेश होगी और उस पर चर्चा होगी।

लोकसभा की विशेषाधिकार समिति में 15 सांसद होते हैं, जबकि राज्यसभा में 10 सांसद होते हैं।

अगर सदन को बहुमत से लगता है कि राहुल गांधी ने गंभीर गलती की है, तो उन्हें चेतावनी दी जा सकती है, निलंबित किया जा सकता है, या सदन से निष्कासित भी किया जा सकता है, जिससे उनकी सदस्यता भी खत्म हो सकती है।

क्या सरकार सच में यह कदम उठाएगी?

यह सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल है। संसद के गलियारों में चर्चा है कि इस सत्र में राहुल गांधी सरकार पर हावी रहे हैं। पहले राष्ट्रपति के अभिभाषण पर विवाद हुआ, फिर जनरल नरवणे की किताब को लेकर टकराव हुआ, लोकसभा कई दिनों तक नहीं चल पाई। इसके अलावा बजट पर बहस के दौरान भी राहुल गांधी ने सरकार पर तीखे हमले किए।

ऐसे में अगर सरकार उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाती है, तो इससे विपक्ष और ज्यादा एकजुट हो सकता है। इसलिए सरकार शायद सीधे टकराव के बजाय कोई बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर सकती है।

इतिहास में पहले भी हो चुका है ऐसा

1) इंदिरा गांधी का मामला (1978)

1978 में तत्कालीन गृह मंत्री चरण सिंह ने इंदिरा गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाया था। आरोप था कि उन्होंने इमरजेंसी के दौरान अधिकारियों के काम में बाधा डाली थी। संसद ने प्रस्ताव मंजूर किया और इंदिरा गांधी को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया, कुछ समय के लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा।

2) सुब्रमण्यम स्वामी का मामला (1976)

1976 में राज्यसभा में सुब्रमण्यम स्वामी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव आया था। उन्हें सदन से निष्कासित कर दिया गया, उनकी राज्यसभा सदस्यता भी समाप्त कर दी गई। इन उदाहरणों से साफ है कि अगर सदन चाहे तो किसी सांसद को विशेषाधिकार हनन के तहत बाहर किया जा सकता है।

आगे क्या हो सकता है?

इस बजट सत्र के सिर्फ दो दिन बचे हैं और विपक्ष लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी में है। ऐसे में अगर सरकार भी राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई करती है, तो संसद में टकराव और बढ़ सकता है। संभावना यह भी है कि सरकार और विपक्ष के बीच कोई समझौता हो जाए, विवाद शांत हो जाए और बजट सत्र का अगला चरण (9 मार्च से 2 अप्रैल) बिना हंगामे के चले।


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Content Writer

Pardeep

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