ट्रंप का नोबेल गुस्सा: भारत के बाद पोलैंड तक पहुंची नाराज़गी, अमेरिका ने सभी संबंध तोड़े
punjabkesari.in Saturday, Feb 07, 2026 - 06:28 PM (IST)
Washington: नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराज़गी अब भारत के बाद पोलैंड तक पहुंच गई है। पोलैंड की संसद के निचले सदन (सेजम) के स्पीकर व्लोद्ज़िमिएर्ज़ चारज़ास्ती द्वारा ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अयोग्य बताए जाने के बाद अमेरिका ने उनके साथ सभी आधिकारिक संबंध तोड़ दिए हैं। डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने दुनिया में “आठ युद्ध समाप्त कराए” हैं और इसलिए वे नोबेल शांति पुरस्कार के हकदार हैं। लेकिन जब इस दावे पर सवाल उठाए गए, तो ट्रंप प्रशासन ने तीखी प्रतिक्रिया दिखाई।
पोलैंड के स्पीकर चारज़ास्ती ने सोमवार को साफ शब्दों में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार के योग्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप की नीति “शक्ति प्रदर्शन और लेन-देन वाली राजनीति” पर आधारित है, जिसमें अक्सर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होता है। चारज़ास्ती के इस बयान के बाद पोलैंड में अमेरिकी राजदूत टॉम रोज़ ने घोषणा की कि अमेरिका स्पीकर के साथ सभी संपर्क खत्म कर रहा है। उन्होंने इस बयान को राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ “अपमानजनक और बिना उकसावे का हमला” बताया। यह कदम इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि पोलैंड लंबे समय से अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी रहा है। पोलैंड 1999 से नाटो का सदस्य है और उसके सैनिकों ने इराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी अभियानों में हिस्सा लिया है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पोलैंड ने लाखों यूक्रेनी शरणार्थियों को भी शरण दी है।
अमेरिकी कार्रवाई के बाद पोलैंड में राजनीतिक और जन प्रतिक्रिया तेज हो गई। एक टीवी चैनल द्वारा कराए गए ऑनलाइन सर्वे में 78% लोगों ने कहा कि चारज़ास्ती को अपने बयान पर कायम रहना चाहिए, जबकि सिर्फ 22% लोगों ने बयान वापस लेने का समर्थन किया। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने सोशल मीडिया पर अमेरिकी राजदूत को जवाब देते हुए लिखा, “सहयोगी देशों को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए, उपदेश नहीं देना चाहिए। पोलैंड में साझेदारी का मतलब यही है।”पूर्व अमेरिकी सैन्य कमांडर बेन होजेस ने भी अमेरिका की इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि इससे अमेरिका अपने सबसे करीबी सहयोगियों को नाराज़ कर रहा है। पोलैंड के सांसद रोमन गिएर्तिख ने अमेरिकी फैसले को “अहंकारी” बताया और ट्रंप की नोबेल मांग की तुलना रोमन सम्राट नीरो से की, जो खुद को महान कलाकार मानता था।
