ट्रंप की धमकियों से करीब आए ईरान-तुर्किये ! इस्तांबुल पहुंचे ईरानी विदेश मंत्री अराघची, शुरू की गुप्त रणनीतिक बातचीत
punjabkesari.in Friday, Jan 30, 2026 - 04:51 PM (IST)
International Desk: मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के खतरे और अमेरिका की कड़ी चेतावनियों के बीच ईरान और तुर्किये ने कूटनीतिक गतिविधियां तेज कर दी हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची गुरुवार को इस्तांबुल पहुंचे, जहां वे तुर्किये के शीर्ष नेतृत्व के साथ अहम और संवेदनशील बातचीत करने वाले हैं। इस्तांबुल पहुंचने के बाद अराघची ने कहा कि क्षेत्र की स्थिति बेहद नाज़ुक है, ऐसे में ईरान और तुर्किये के बीच सामान्य से कहीं अधिक संवाद हो रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा आगे बढ़ाए जा रहे लक्ष्यों ने दोनों देशों को आपसी समन्वय बनाए रखने के लिए मजबूर किया है।
🚨🇹🇷🇮🇷 Turkey’s top diplomat Hakan Fidan met with Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi in Istanbul as part of a broader regional push to calm tensions with the U.S. and avoid military confrontation.
— Mario Nawfal (@MarioNawfal) January 30, 2026
The talks are happening in the shadow of Trump’s warnings about possible… https://t.co/hfaCCK9F58 pic.twitter.com/XpFeKOBEM1
तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान पहले ही अराघची से मुलाकात कर चुके हैं। यह बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब अंकारा खुद को अमेरिका और ईरान के बीच संभावित सैन्य टकराव रोकने वाले मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है। तुर्किये लंबे समय से क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की बात करता रहा है।यह दौरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन धमकियों के बाद हो रहा है, जिनमें उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और “आर्माडा” (युद्धपोतों का बेड़ा) भेजने की बात कही थी। अमेरिका पहले ही फारस की खाड़ी में अपने युद्धपोत और लड़ाकू विमान तैनात कर चुका है।
दौरे के दौरान अराघची की तुर्की राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से भी मुलाकात प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ईरान पर अमेरिकी दबाव, इज़राइल की भूमिका, गाजा युद्ध और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गहन चर्चा होगी। विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान और तुर्किये दोनों नहीं चाहते कि अमेरिका के साथ टकराव खुली जंग में बदले। यही वजह है कि अंकारा की मध्यस्थता और तेहरान की सक्रिय कूटनीति को युद्ध टालने की आखिरी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
