रूस ने ट्रंप के झूठे दावों की खोली पोल, कहा- भारत ने रूसी तेल खरीद रोकने की कोई बात नहीं की

punjabkesari.in Tuesday, Feb 03, 2026 - 05:23 PM (IST)

Moscow: रूस ने स्पष्ट किया है कि उसे भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद रोकने को लेकर कोई आधिकारिक संदेश प्राप्त नहीं हुआ है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को कहा कि रूस भारत के साथ अपने संबंधों को हर संभव तरीके से आगे बढ़ाना चाहता है। पेस्कोव की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूसी तेल की खरीद रोकने और अमेरिका तथा संभावित रूप से वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमति जताई है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा, “इस मामले पर नई दिल्ली की ओर से हमें अभी तक कोई बयान नहीं मिला है।” उन्होंने कहा कि रूस अमेरिका-भारत के द्विपक्षीय संबंधों का सम्मान करता है, लेकिन भारत-रूस के बीच उन्नत रणनीतिक साझेदारी को भी उतना ही महत्व देता है।

 

पेस्कोव ने कहा, “हमारे लिए सबसे अहम बात भारत के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाना है और हम इन्हें हर संभव तरीके से विकसित करना चाहते हैं।”रूसी मीडिया के अनुसार, पेस्कोव ने कहा, “मॉस्को को अभी तक भारत द्वारा तेल खरीद रोकने को लेकर कोई बयान या सूचना नहीं मिली है।” यह बयान भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा के एक दिन बाद आया है, जिसके तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए पारस्परिक शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने का फैसला किया है। ट्रंप ने पिछले वर्ष भारत पर कुल 50 प्रतिशत शुल्क लगाया था, जिसमें रूसी ऊर्जा खरीद से जुड़ा 25 प्रतिशत शुल्क भी शामिल था। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और फरवरी 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद वह रियायती रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 88 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी करता है।

 

वर्ष 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूस से दूरी बनाए जाने के चलते भारत रियायती रूसी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया था। हालांकि हाल के महीनों में भारत के रूसी तेल आयात में गिरावट दर्ज की गई है जबकि इराक और सऊदी अरब से आपूर्ति बढ़ी है। व्यापारिक आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में भारत का रूसी तेल आयात दो वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि ओपेक देशों की हिस्सेदारी बढ़कर 53 प्रतिशत से अधिक हो गई। इसके बावजूद रूस मौजूदा वित्त वर्ष में भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। इसी बीच, क्रेमलिन ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि न्यू स्टार्ट परमाणु संधि की समाप्ति के साथ दुनिया एक “खतरनाक दौर” की ओर बढ़ रही है। पेस्कोव ने कहा कि इस संधि के खत्म होने के बाद दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के पास हथियारों को सीमित करने वाला कोई मूलभूत दस्तावेज नहीं बचेगा।
 


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Content Writer

Tanuja

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