‘नो-कम्प्रोमाइज’, ''हम ट्रंप के हटने का इंतजार करेंगे'', भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर रूबियो से बोले थे अजित डोभाल
punjabkesari.in Thursday, Feb 05, 2026 - 04:13 AM (IST)
नेशनल डेस्कः ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो से साफ शब्दों में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत को धमका या दबा नहीं सकते। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जरूरी हुआ तो नई दिल्ली ट्रंप का कार्यकाल खत्म होने तक भी इंतजार करने को तैयार है, लेकिन दबाव में आकर कोई खराब व्यापार समझौता नहीं करेगी।
डोभाल की सितंबर में वॉशिंगटन यात्रा — क्यों हुई?
अजित डोभाल सितंबर की शुरुआत में वॉशिंगटन गए थे। यह यात्रा ऐसे समय हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी। उस समय भारत-अमेरिका संबंधों में काफी तनाव था। ब्लूमबर्ग के अनुसार, डोभाल का उद्देश्य अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव को कम करना और व्यापार वार्ता को फिर से पटरी पर लाना था। नई दिल्ली के अधिकारियों ने बताया कि डोभाल का संदेश साफ था—भारत टकराव नहीं चाहता, लेकिन झुककर भी सौदा नहीं करेगा।
डोभाल ने रुबियो से क्या कहा?
बैठक के दौरान अजित डोभाल ने रुबियो से कहा कि भारत को ट्रंप या उनके वरिष्ठ अधिकारियों से डराया नहीं जा सकता। भारत पहले भी कठिन अमेरिकी प्रशासन से निपट चुका है। नई दिल्ली सम्मानजनक और संतुलित समझौता चाहती है, दबाव वाला नहीं।
अगस्त में ट्रंप का भारत पर बड़ा हमला
इस बैठक से ठीक पहले अगस्त में ट्रंप ने भारत पर कड़ा आर्थिक प्रहार किया था। उन्होंने भारतीय उत्पादों पर 50% टैरिफ लगा दिया था। सार्वजनिक रूप से भारत की व्यापार नीतियों की आलोचना की थी और रूस से तेल खरीदने पर भी भारत को निशाना बनाया था। इससे दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हो गए थे।
डोभाल की कोशिश रंग लाई — मोदी-ट्रंप बातचीत बढ़ी
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, डोभाल की दखल का असर दिखा। 16 सितंबर को ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को उनके जन्मदिन पर फोन किया। ट्रंप ने मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वे “शानदार काम” कर रहे हैं। साल के अंत तक दोनों नेताओं ने कुल पांच बार बात की। धीरे-धीरे व्यापार समझौते की जमीन तैयार हुई।
नया व्यापार समझौता — क्या तय हुआ?
सोमवार को ट्रंप ने ऐलान किया कि भारत के साथ नया व्यापार समझौता हो गया है। इसके तहत भारत पर अमेरिकी टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया गया। रूस से तेल खरीदने पर लगाया गया दंडात्मक शुल्क खत्म कर दिया गया। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि भारत ने बदले में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान खरीदने पर सहमति दी है। वेनेजुएला से तेल खरीदने पर विचार करने की बात कही है और अमेरिकी आयात पर टैरिफ शून्य करने का वादा किया है। हालांकि, अभी तक किसी भी पक्ष ने आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किए हैं।
भारत की रणनीति — ट्रंप अस्थायी, रिश्ता स्थायी
ब्लूमबर्ग रिपोर्ट कहती है कि नई दिल्ली का मानना है कि ट्रंप एक अस्थायी दौर हैं, लेकिन अमेरिका एक दीर्घकालिक साझेदार है। भारत को अमेरिकी पूंजी, तकनीक और सैन्य सहयोग की जरूरत है। खासकर चीन से मुकाबले और 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य के लिए अमेरिका महत्वपूर्ण है।
रिश्तों में दरार पहले कैसे पड़ी?
इस साल मई में ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन चले संघर्ष को सुलझाया। भारतीय सेना और पीएम मोदी ने इस दावे को खारिज कर दिया था। इसके बाद मोदी ने ट्रंप के व्हाइट हाउस निमंत्रण को भी ठुकरा दिया, जब ट्रंप ने पाकिस्तानी नेतृत्व को बुलाया था।
नए अमेरिकी राजदूत से उम्मीदें बढ़ीं
दिसंबर में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर भारत आए। वे ट्रंप और रुबियो दोनों के करीबी माने जाते हैं। उन्होंने बार-बार कहा कि भारत-अमेरिका रिश्ता बेहद अहम है। उनकी नियुक्ति से रिश्तों में नई ऊर्जा आई है।
