चाइना डोर की चपेट में आया साढ़े तीन साल का बच्चा, गर्दन पर लगी गंभीर चोट
punjabkesari.in Wednesday, Aug 12, 2026 - 06:12 PM (IST)
नेशनल डेस्क : राष्ट्रीय राजधानी में चीनी मांझे पर लगी रोक और पुलिस की सख्ती के बावजूद नायलॉन से बने इस मांझे की बिक्री पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है और इस प्रतिबंधित डोर की चपेट में आने से केवल अगस्त महीने में अब तक एक बच्चे समेत कम से कम दो लोग घायल हो चुके हैं। दिल्ली पुलिस ने 15 अगस्त को राष्ट्रीय राजधानी और इसके आसपास के इलाकों में होने वाली पतंगबाजी से पहले, प्रतिबंधित चीनी मांझे की अवैध बिक्री के खिलाफ अभियान चलाया है। राष्ट्रीय राजधानी में अलग-अलग कार्रवाइयों में पुलिस ने चीनी मांझे की 3500 से अधिक चरखियां जब्त की हैं और वह स्थानीय स्तर पर दुकानदारों तथा लोगों को जागरूक भी कर रही है। पुलिस लोगों को यह जानकारी भी दे रही है कि चीनी मांझे से पतंग उड़ाना या इस मांझे को बेचना, रखना और खरीदना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत चीनी मांझे का उपयोग करना एक दंडनीय अपराध है और इसका उल्लंघन करने वालों को पांच साल तक की कैद, एक लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया जाता है। राष्ट्रीय राजधानी और आसपास के इलाकों में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बड़े पैमाने पर पतंगबाजी की जाती है। इसके मद्देनजर कई इलाकों में पतंग बाजार लगते हैं, जिनमें पुरानी दिल्ली के काला कुआं और जाफराबाद के पतंग बाजार मशहूर हैं। चीनी मांझे के खिलाफ पुलिस की अपीलों का जमीनी स्तर पर असर होता नहीं दिख रहा।
उत्तर पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा इलाके में स्कूटी पर अपने बड़े भाई के साथ बाजार जा रहे साढ़े तीन साल के बच्चे की गर्दन प्रतिबंधित चीनी मांझे की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया। उसके परिवार के सदस्यों के मुताबिक, यह घटना भजनपुरा थाना क्षेत्र के विजय पार्क इलाके में एक अगस्त की शाम को हुई। उन्होंने बताया कि अदनान अपने बड़े भाई अरमान (17) के साथ स्कूटी पर बाजार जा रहा था तभी चीनी मांझे की चपेट में आने से उसकी गर्दन गंभीर रूप से जख्मी हो गई और वह घबरा गया। हालांकि, परिवार ने घटना की सूचना पुलिस को नहीं दी है।
पीड़ित के बड़े भाई अरमान ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि वह अपने साढ़े तीन साल के भाई को स्कूटी पर आगे बैठाकर सब्जी खरीदने के लिए घर से निकला था और जब वह इलाके की एक गली में घुसा, तभी अचानक मांझा सामने आ गया जिससे पहले उसकी बांह मामूली रूप से जख्मी हुई और फिर आगे बैठे अदनान की गर्दन मांझे की चपेट में आ गई। परिवार के मुताबिक, गली में स्कूटी की रफ्तार कम होने के कारण अरमान ने तुरंत वाहन रोक दिया और मांझे को हटाया, लेकिन तब तक बच्चे की गर्दन पर गंभीर चोट लग चुकी थी और खून बहने लगा था। अरमान ने कहा कि मांझा प्लास्टिक का था और टूट नहीं रहा था। उन्होंने कहा कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने घर पर इसकी सूचना दी, जिसके बाद परिवार के सदस्य आए और बच्चे को स्थानीय डॉक्टर के पास लेकर गए जहां उसका उपचार किया गया और कई दिनों तक उसकी मरहम-पट्टी की गई।
परिवार ने कहा कि स्कूटी की रफ्तार कम थी, इसलिए बच्चे की जान बच गई लेकिन अगर उसकी रफ्तार ज्यादा होती तो कोई अनहोनी हो सकती थी। बच्चे की मां रेशमा ने बताया कि घटना के बाद बच्चा दहशत में आ गया और तीन-चार दिन तक वह कुछ खा-पी नहीं पा रहा था। उन्होंने कहा, ''बच्चा यहां तक कि दूध भी नहीं पी रहा था।'' इससे पहले मई में उत्तर पूर्वी दिल्ली के ही उस्मानपुर इलाके में मोटरसाइकिल पर अपने परिवार के साथ जा रहे पांच वर्षीय बच्चे की प्रतिबंधित चीनी मांझे की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
पुलिस के मुताबिक, इस घटना में बच्चे की गर्दन मांझे से कट गई थी। पुलिस ने बताया कि उत्तम नगर में भी पांच अगस्त को मोटरसाइकिल चलाते समय मांझे की चपेट में आने से 32 वर्षीय व्यक्ति की गर्दन गंभीर रूप से जख्मी हो गई, जिसके बाद उसे एक अस्पताल ले जाया गया जहां उसका उपचार किया गया। चीनी मांझे की खरीद-फरोख्त और उपयोग पर प्रतिबंध है। यह मांझा नायलॉन के धागे से बना होता है और इस पर कांच और धातु का लेप लगाया जाता है, जिससे यह आसानी से नहीं टूटता और घातक साबित होता है।
उत्तर पूर्वी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) राहुल अलवल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि पुलिस प्रतिबंधित चीनी मांझे की अवैध बिक्री के खिलाफ अभियान चलाने के साथ-साथ लोगों को इसके इस्तेमाल के खतरों के बारे में जागरूक भी कर रही है। उन्होंने कहा कि इस साल उनके जिले की पुलिस ने नायलॉन से बने मांझे की अब तक 627 चरखियां जब्त की हैं और 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। अलवल ने बताया कि घातक मांझों से दोपहिया वाहन सवारों को बचाने के लिए जिले के कई फ्लाइओवर की चारदीवारी के समानांतर तार लगाए गए हैं, ताकि मांझा इन तारों के ऊपर से निकल जाए और सड़क से गुजर रहे दोपहिया वाहन सवार उसकी चपेट में न आएं।
