EPFO में हुए 8 बड़े बदलाव... क्लेम से लेकर नॉमिनी तक बदल गए ये नियम
punjabkesari.in Saturday, Aug 08, 2026 - 07:22 PM (IST)
नेशनल डेस्क : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने वर्ष 2026 में भविष्य निधि (PF) से जुड़े नियमों में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। इन बदलावों का सीधा असर EPF, EPS और EDLI योजनाओं से जुड़े कर्मचारियों पर पड़ेगा। नए नियमों का उद्देश्य PF से जुड़े कामकाज को आसान बनाना, निकासी की प्रक्रिया को सरल करना, डिजिटल सुविधाओं को बढ़ावा देना और जवाबदेही तय करना है।
इन बदलावों के जरिए सदस्यों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ जारी रखते हुए प्रक्रियाओं को कम जटिल बनाने की कोशिश की गई है। आइए जानते हैं 2026 में PF से जुड़े प्रमुख बदलाव क्या हैं और इनका कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा।
PF में योगदान 12% ही रहेगा
EPFO के मुताबिक कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों का PF में योगदान फिलहाल 12 प्रतिशत बना रहेगा। 15,000 रुपये तक की मासिक बेसिक सैलरी वाले कर्मचारियों के लिए न्यूनतम अनिवार्य योगदान 1,800 रुपये होगा। हालांकि, 15,000 रुपये से अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारी अपनी इच्छा के अनुसार ज्यादा योगदान कर सकते हैं। सरकार भविष्य में PF के लिए तय वेतन सीमा को बढ़ाकर 25,000 रुपये कर सकती है।
वेतन सीमा में बदलाव का रास्ता आसान
EPF योजना में वेतन सीमा से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। पहले योजना में 15,000 रुपये की वेतन सीमा का स्पष्ट उल्लेख था। अब इसके बजाय केंद्र सरकार की ओर से अधिसूचित वेतन सीमा का प्रावधान किया गया है। इससे भविष्य में वेतन सीमा में बदलाव के लिए पूरी योजना में संशोधन करने की जरूरत कम होगी और सरकार के लिए इसे बदलना आसान हो जाएगा।
PF से निकासी के नियम सरल
EPFO ने PF की आंशिक निकासी से जुड़े नियमों को भी आसान किया है। पहले अलग-अलग जरूरतों के लिए कई तरह की निकासी श्रेणियां और अलग-अलग शर्तें थीं। अब पात्र निकासी को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में बांटा गया है- आपात स्थिति, घर से जुड़ी जरूरतें और विशेष परिस्थितियां। इससे सदस्यों के लिए आंशिक PF निकासी के लिए आवेदन करना आसान होने की उम्मीद है।
PF खाते में 25% राशि रखना जरूरी
नए ढांचे के तहत PF खाते में जमा राशि का कम से कम 25 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित रखना होगा, जबकि तय शर्तों के तहत पात्र सदस्य बाकी 75 प्रतिशत राशि की आंशिक निकासी कर सकेंगे। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को तत्काल जरूरत के समय PF राशि का इस्तेमाल करने की सुविधा देने के साथ-साथ भविष्य के लिए कुछ रकम सुरक्षित रखना है।
निकासी के लिए 12 महीने की सेवा जरूरी
2026 के नियमों में पात्र निकासी के लिए सेवा अवधि को भी एक समान करने का प्रावधान किया गया है। अब सामान्य तौर पर पात्र श्रेणियों में निकासी से पहले सदस्य को कम से कम 12 महीने की सेवा पूरी करनी होगी। चिकित्सा कारणों से निकासी के लिए भी 12 महीने की सेवा की शर्त लागू होने की बात कही गई है।
PF क्लेम निपटाने की समय सीमा 20 दिन
EPFO ने PF क्लेम के निपटारे की समय सीमा घटाकर 20 दिन कर दी है। नियमों के मुताबिक, अगर वैध कारण के बिना क्लेम के निपटारे में देरी होती है तो 12 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज का प्रावधान किया गया है। इससे क्लेम प्रक्रिया में तेजी लाने और अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाने का लक्ष्य है।
डिजिटल नॉमिनेशन को बढ़ावा
EPFO ने नॉमिनेशन प्रक्रिया को भी डिजिटल बनाने की दिशा में कदम उठाया है। कागजी नॉमिनेशन प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करते हुए ऑनलाइन नॉमिनेशन को औपचारिक रूप से मान्यता दी गई है। इससे सदस्यों और नियोक्ताओं के लिए प्रक्रिया आसान होगी और कागजी कार्रवाई कम होने की उम्मीद है।
बेरोजगारी के बाद PF निकालने के नियम बदले
नौकरी छोड़ने के बाद PF की पूरी राशि निकालने के नियमों में भी बदलाव किया गया है। पहले सदस्य दो महीने तक बेरोजगार रहने के बाद पूरी PF राशि निकाल सकता था। नए नियमों के तहत पूरी PF राशि निकालने के लिए 12 महीने की बेरोजगारी जरूरी होगी। हालांकि, आंशिक निकासी की सुविधा जारी रहेगी। इसके लिए भी निर्धारित प्रतीक्षा अवधि बढ़ाकर 36 महीने किए जाने का प्रावधान है।
कर्मचारियों पर क्या होगा असर?
कुल मिलाकर EPFO के नए बदलावों का उद्देश्य PF व्यवस्था को अधिक सरल और डिजिटल बनाना है। आंशिक निकासी के नियम आसान होने से जरूरत के समय कर्मचारियों को PF का इस्तेमाल करने में सुविधा मिल सकती है। वहीं, पूरी राशि निकालने के लिए लंबी प्रतीक्षा अवधि का उद्देश्य कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा के लिए PF में पर्याप्त रकम बनाए रखना है।
