हौसले की उड़ान: सूफिया सूफी ने मनाली-लेह हाई-एल्टीट्यूड रन 98 घंटे में पूरा कर रचा इतिहास
punjabkesari.in Saturday, Jan 31, 2026 - 10:48 PM (IST)
नेशनल डेस्क: भारतीय अल्ट्रा-डिस्टेंस रनर सूफिया सूफी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे पहाड़ भी झुक जाते हैं। उन्होंने हिमालय के सबसे कठिन और जानलेवा माने जाने वाले मनाली-लेह हाईवे को पैदल दौड़ते हुए 98 घंटे 27 मिनट में पूरा कर नया इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि के साथ सूफिया इस रूट को सबसे कम समय में पूरा करने वाली दुनिया की पहली महिला बन गई हैं।
470 किलोमीटर, कम ऑक्सीजन और जानलेवा मौसम
मनाली से लेह तक का यह सफर करीब 470 से 480 किलोमीटर लंबा है, जिसे दुनिया के सबसे मुश्किल अल्ट्रा-रनिंग रूट्स में गिना जाता है। इस दौड़ के दौरान सूफिया को बारालाचा ला, नकी ला और टंगलांग ला जैसे पांच ऊंचे हिमालयी दर्रों को पार करना पड़ा। कुल ऊंचाई लाभ 8,500 मीटर से ज्यादा रहा, जहां ऑक्सीजन की कमी, अचानक बदलता मौसम और खराब सड़कें किसी भी धावक की हिम्मत तोड़ सकती हैं।
लक्ष्य था 100 घंटे, हासिल किया 98 घंटे में
सूफिया का लक्ष्य इस चुनौती को 100 घंटे से कम समय में पूरा करने का था। उन्होंने न सिर्फ यह लक्ष्य हासिल किया, बल्कि 4 दिन 2 घंटे 27 मिनट में दौड़ पूरी कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। यह रिकॉर्ड अगस्त 2023 में बनाया गया था, जिसे उसी साल मंजूरी मिल गई थी। हाल ही में उन्हें इसका आधिकारिक प्रमाण पत्र मिला है।
सोशल मीडिया पर शेयर की खुशी, फैंस बोले – इंस्पिरेशन
प्रमाण पत्र मिलने के बाद सूफिया ने सोशल मीडिया पर अपनी उपलब्धि साझा की। उन्होंने लिखा कि यह सफर शारीरिक से ज्यादा मानसिक परीक्षा था। उन्होंने अपनी सपोर्ट टीम, स्पॉन्सर्स और उन सभी लोगों का धन्यवाद किया, जिन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया। पोस्ट के बाद हजारों लोगों ने उनकी तारीफ की और इस उपलब्धि को “अविश्वसनीय” और “प्रेरणादायक” बताया।
रिकॉर्ड बनाना सूफिया के लिए नया नहीं
सूफिया सूफी इससे पहले भी कई बड़े कीर्तिमान अपने नाम कर चुकी हैं। वह कश्मीर से कन्याकुमारी तक सबसे तेज दौड़ पूरी करने वाली महिला रह चुकी हैं। उन्होंने भारत के गोल्डन क्वाड्रिलैटरल रूट को भी दौड़ते हुए पूरा किया है। इसके अलावा कतर में उत्तर से दक्षिण 200 किलोमीटर की दौड़ और 2021 में पहली महिला के रूप में मनाली-लेह रूट पूरा करना भी उनके नाम दर्ज है।
महिलाओं के लिए बनीं मिसाल
सूफिया की यह सफलता सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि लाखों युवाओं और खासकर महिलाओं के लिए संदेश है कि कठिन हालात और सीमाएं सिर्फ दिमाग में होती हैं। सही ट्रेनिंग, मजबूत इरादे और आत्मविश्वास के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
