OMG! 360 रानियां और 83 बच्चे: इतिहास का वो ''अय्याश'' राजा जो हर रात नई रानी के साथ ऐसे बिताता था अपनी रातें, सोने के लिए तय थे ये नियम

punjabkesari.in Thursday, Mar 05, 2026 - 01:22 PM (IST)

Maharaja Bhupinder Singh Patiala Life History : भारतीय रियासतों के इतिहास में जब भी ऐश्वर्य और विलासिता की बात होती है तो पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह का नाम सबसे ऊपर आता है। 1900 से 1938 तक शासन करने वाले इस महाराजा की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। उनके पास न केवल अपार दौलत थी बल्कि उनकी निजी जिंदगी के कायदे-कानून भी बेहद अनोखे थे।

365 रानियां और 88 बच्चों का परिवार

महाराजा भूपिंदर सिंह के निजी जीवन को लेकर कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड मौजूद हैं। उनकी 10 आधिकारिक पत्नियां थीं लेकिन उनके महल के हरम में लगभग 350 अन्य महिला साथी भी थीं जिन्हें रानी का ही सम्मान प्राप्त था। उनके कुल 88 बच्चे थे जिनमें से 52 वयस्क होने तक जीवित रहे। इतनी बड़ी संख्या में रानियां होने के कारण उन्होंने उनके रहने के लिए विशेष महल बनवाए थे।

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सोने के लिए लालटेन वाला अनोखा नियम

महाराजा के बारे में सबसे चर्चित किस्सा उनकी रातों को बिताने के तरीके से जुड़ा है। कहा जाता है कि उनके महल में हर रात 360 लालटेनें जलाई जाती थीं और हर एक पर एक रानी का नाम लिखा होता था। सुबह होने पर जो लालटेन सबसे पहले बुझती थी महाराजा उसी नाम की रानी के साथ अगली रात बिताने का फैसला करते थे। यह उनका अपनी विलासी जीवनशैली को व्यवस्थित करने का एक तरीका था।

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रोल्स रॉयस और दुनिया का सबसे महंगा हार

महाराजा भूपिंदर सिंह को महंगी चीजों का बेहद शौक था। उनके पास 44 रोल्स रॉयस कारें थीं। 1928 में उन्होंने मशहूर ज्वेलरी कंपनी कार्टियर से एक नेकलेस बनवाया था जिसमें 2,930 हीरे जड़े थे। इसका मुख्य आकर्षण 234 कैरेट का डी बियर्स डायमंड था जो उस समय दुनिया का सातवां सबसे बड़ा हीरा था। उन्होंने अपने निजी आनंद के लिए लीला भवन बनवाया था जहां एक विशाल स्विमिंग पूल था। इसमें एक साथ 150 लोग स्नान कर सकते थे।

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क्रिकेट के मैदान पर कैप्टन का जलवा

भूपिंदर सिंह केवल अय्याशी के लिए ही नहीं बल्कि खेलों के प्रति अपने समर्पण के लिए भी याद किए जाते हैं। वे एक बेहतरीन क्रिकेटर थे और 1911 में इंग्लैंड दौरे पर गई भारतीय टीम के कप्तान रहे। भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी घरेलू प्रतियोगिता 'रणजी ट्रॉफी' को शुरू करने में उनकी अहम भूमिका थी। उन्होंने ही अपने मित्र रणजीत सिंह की याद में इसे दान किया था। उन्होंने चेल (हिमाचल प्रदेश) में दुनिया का सबसे ऊंचा क्रिकेट मैदान बनवाया जो आज भी एक रिकॉर्ड है।

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खान-पान और विदा

उनके बारे में मशहूर है कि उनकी भूख भी शाही थी और वे एक बार में दर्जनों बटेर खा सकते थे। 1938 में उनके निधन के साथ ही भारतीय इतिहास के एक बेहद भव्य और विवादास्पद युग का अंत हो गया।


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Content Editor

Rohini Oberoi

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