Brain Stroke : युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा ब्रेन स्ट्रोक का खतरा, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
punjabkesari.in Sunday, Mar 22, 2026 - 08:27 PM (IST)
नेशनल डेस्क : बदलती जीवनशैली और बढ़ते तनाव के बीच ब्रेन स्ट्रोक अब एक गंभीर और आम होती जा रही स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। डॉक्टरों के अनुसार, यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह अचानक बाधित हो जाता है या किसी रक्त वाहिका के फटने से अंदर रक्तस्राव होने लगता है, जिससे दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है।
किन कारणों से बढ़ रहा खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान और मोटापा ब्रेन स्ट्रोक के प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा अनियमित दिनचर्या, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित आहार और लगातार तनाव भी जोखिम को बढ़ाते हैं। पहले यह समस्या अधिक उम्र के लोगों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब युवाओं में भी इसके मामले तेजी से सामने आ रहे हैं।
अचानक दिखते हैं ये लक्षण
न्यूरोलॉजिस्टों के मुताबिक, ब्रेन स्ट्रोक के संकेत बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक प्रकट होते हैं। शरीर के एक हिस्से में कमजोरी या सुन्नता, चेहरे का टेढ़ा हो जाना या मुस्कुराने में दिक्कत इसके सामान्य लक्षण हैं। इसके साथ ही बोलने में परेशानी, शब्दों का अस्पष्ट उच्चारण या दूसरों की बात समझने में कठिनाई भी देखी जा सकती है। कई मामलों में तेज सिरदर्द, चक्कर आना, आंखों से धुंधला या दोहरा दिखना, संतुलन बिगड़ना और चलने में दिक्कत जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं।
लक्षण दिखते ही तुरंत उठाएं ये कदम
विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में समय सबसे अहम होता है। यदि किसी व्यक्ति में इसके लक्षण नजर आएं, तो बिना देरी किए उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाना चाहिए या एम्बुलेंस बुलानी चाहिए। मरीज को आराम की स्थिति में लिटाकर उसका सिर थोड़ा ऊंचा रखना चाहिए और उसे शांत बनाए रखना जरूरी है। इस दौरान मरीज को कुछ भी खाने-पीने के लिए नहीं देना चाहिए, क्योंकि निगलने में दिक्कत हो सकती है। साथ ही उसकी सांस, नाड़ी और होश की स्थिति पर लगातार नजर रखना चाहिए।
बचाव के लिए अपनाएं स्वस्थ आदतें
डॉक्टरों के अनुसार, ब्रेन स्ट्रोक से बचने के लिए संतुलित जीवनशैली बेहद जरूरी है। नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रण और पौष्टिक आहार अपनाना जोखिम को कम करता है। नमक और तेल का सीमित सेवन, धूम्रपान और शराब से दूरी भी बेहद जरूरी है। इसके अलावा हाई बीपी, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों की नियमित जांच और सही इलाज भी स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम कर सकता है।
इलाज में देरी हो सकती है खतरनाक
ब्रेन स्ट्रोक का उपचार उसके प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है। समय पर इलाज मिलने पर दवाइयों, फिजियोथेरेपी और जरूरत पड़ने पर सर्जरी के जरिए मरीज को बेहतर किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, उतनी ही रिकवरी की संभावना बढ़ जाती है।
