''काम नहीं कर रहे तो हटाओ!'' राज्यसभा में राघव चड्ढा ने उठाया ‘Right to Recall’ का मुद्दा
punjabkesari.in Wednesday, Feb 11, 2026 - 04:50 PM (IST)
नेशनल डेस्क: राज्यसभा में बुधवार को शून्यकाल के दौरान सदस्यों ने काम नहीं करने की स्थिति में जन प्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार मतदाताओं को दिए जाने, प्रशासनिक लापरवाही के चलते हुए बड़े हादसों और अभिभावकों की वृद्धावस्था में देखभाल न किए जाने जैसे मुद्दे उठाए तथा सरकार से अपेक्षित कदम उठाने का अनुरोध किया। शून्यकाल में आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा ने कहा कि जिस तरह मतदाताओं को मतदान का अधिकार है उसी तरह, काम नहीं करने की स्थिति में 'राइट टू रिकॉल' (जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार) भी मतदाताओं के पास होना चाहिए। चड्ढा ने कहा ''अगर देश का मतदाता अपने नेताओं को चुन सकता है तो उसे उन्हें काम न करने पर हटाने का हक भी होना चाहिए।

'राइट टू रिकॉल' व्यवस्था मतदाताओं को अधिकार संपन्न बनाएगी ताकि अगर जन प्रतिनिधि काम न करे तो उसे हटाया जा सके।'' उन्होंने कहा कि सांसद या विधायक चुने जाने के बाद अगर जन प्रतिनिधि काम न करे तो जनता के पास पांच साल तक बर्दाश्त करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। ''गलत नेता को चुनने के एक गलत फैसले से पूरा क्षेत्र, पूरा समय बर्बाद होता है और लाखों मतदाता इसका खामियाजा भुगतते हैं।'' चड्ढा ने स्पष्ट किया कि 'राइट टू रिकॉल' नेताओं के खिलाफ हथियार नहीं है बल्कि यह लोकतंत्र को मजबूत बनाएगा। उन्होंने कहा कि 'राइट टू रिकॉल' के तहत मतदाता एक निर्धारित और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से निर्वाचित प्रतिनिधि को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकेंगे। चड्ढा ने कहा कि भारत में पहले ही राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और न्यायाधीशों के लिए महाभियोग की व्यवस्था है और सरकारों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका, स्विटजरलैंड और कनाडा सहित दुनिया के 20 से अधिक लोकतांत्रिक देशों में 'राइट टू रिकॉल' की व्यवस्था है। हमारे देश में कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में ग्राम पंचायत में यह व्यवस्था है।''
चड्ढा ने कहा कि 'राइट टू रिकॉल' का दुरूपयोग न हो इसके लिए सुरक्षात्मक उपाय भी होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधि को हटाने के मजबूत आधार होना चाहिए, इसके लिए हस्ताक्षर करने वालों की संख्या करीब 35 से 40 फीसदी हो और नेता को 18 माह के लिए 'परफार्मेंस पीरियड' भी देना चाहिए ताकि वह अपना काम सुधार सके। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर पार्टियां भी काम करने वाले नेता को टिकट देंगी और हमारा लोकतंत्र मजबूत होगा। आप के ही अशोक कुमार मित्तल ने दर्दनाक और खतरनाक हादसों का मुद्दा उठाया और कहा कि इनकी वजह केवल प्रशासनिक लापरवाही होती है। उन्होंने कहा ''16 जनवरी को नोएडा में 27 साल के युवक की पानी में डूब कर मौत हो गई। पांच फरवरी को दिल्ली में एक नौजवान की गड्ढे में गिर कर जान चली गई। कल रोहिणी में एक युवक ने पानी से भरे खुले गड्ढे में गिर कर अपनी जान गंवा दी।'' उन्होंने कहा कि सबसे साफ शहर माने जाने वाले इंदौर में दूषित पानी पी कर करीब 23 लोग मारे गए वहीं जहरीला कफ सिरप पीने से कितने बच्चों की जान चली गई। मित्तल ने कहा कि झांसी के मेडिकल कालेज में कई बच्चे आग में जल कर मारे गए और फरीदाबाद में सरकारी मेले के अंदर झूला गिरने से एक एएसआई की जान चली गई तथा कई लोग घायल हो गए। उन्होंने कहा '' उच्चतम न्यायालय ने आवारा कुत्तों के मामले में बार बार दिशानिर्देश दिए, पर हाल में ही आवारा कुत्ते एक नवजात का सिर लेकर घूमते दिखे। ये घटनाएं मानव जनित हैं। ''

मित्तल ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने मांग की कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए संहिताबद्ध कानून बनाया जाए और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। भारतीय जनता पार्टी के बाबूराम निषाद ने श्रीअन्न से संबंधित मुद्दा उठाया और बुंदेलखंड के हमीरपुर में राष्ट्रीय श्रीअन्न प्रसंस्करण एवं निर्यात केंद्र स्थापित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि मोटे अनाज के उत्पादन के लिए जिस तरह की जलवायु तथा मिट्टी की जरूरत होती है, बुंदेलखंड में वैसी ही जलवायु और मिट्टी है। समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल कंजर जनजाति का नाम बदलने की मांग की। उन्होंने कहा ''कंजर नाम से वह लोग खुद को अपमानित महसूस करते हैं।''
भाजपा के राधामोहन दास ने विदेशों में बस गए ऐसे भारतीयों को उनका पासपोर्ट रद्द कर वापस बुलाने की मांग की जिन्होंने भारत में रह रहे अपने अभिभावकों की देखभाल की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। द्रमुक सदस्य पी विल्सन ने अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों के खिलाफ कथित अत्याचार का मुद्दा उठाया और सरकार से संबंधित कानून को और अधिक कठोर बनाने की मांग की। जनता दल (यूनाइटेड) के खीरू महतो ने वन अधिनियम से जुड़ा मुद्दा उठाया। शून्यकाल में ही भाजपा के धनंजय भीमराव महादिक, नरहरि अमीन और तृणमूल कांग्रेस के रीताव्रता बनर्जी ने भी आसन की अनुमति से अपने-अपने मुद्दे उठाए।
