बिहार में गरीब होना इतना बड़ा गुनाह है? कोई न आया तो बेटियों ने उठाई अर्थी, अब तेरहवीं के पैसे के लिए...
punjabkesari.in Friday, Jan 30, 2026 - 11:34 PM (IST)
नेशनल डेस्कः बिहार के छपरा जिले से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। छपरा से करीब 22 किलोमीटर दूर मढोरा के पास स्थित जवईनियां गांव में एक गरीब महिला की मौत के बाद ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे समाज पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गांव में बबीता देवी नाम की महिला की मौत हो गई, लेकिन उनकी अर्थी को कंधा देने के लिए गांव से कोई भी आगे नहीं आया। मजबूरी में उनकी दो बेटियों ने ही मां की अर्थी उठाई और खुद ही मुखाग्नि दी। यह घटना न सिर्फ दर्दनाक है, बल्कि यह भी दिखाती है कि गरीबी के कारण लोग किस तरह समाज से कट जाते हैं।
गरीबी ने समाज से कर दिया अलग
जानकारी के मुताबिक, करीब डेढ़ साल पहले बबीता देवी के पति रविंद्र सिंह की भी मौत हो गई थी। इसके बाद से परिवार की हालत बेहद खराब हो गई थी। घर में कमाने वाला कोई नहीं था और दोनों बेटियां ही मां का सहारा थीं। पति की मौत के बाद परिवार आर्थिक तंगी में जी रहा था। धीरे-धीरे लोग भी इस परिवार से दूरी बनाने लगे। अब जब बबीता देवी की मौत हुई तो कोई भी गांव वाला कंधा देने तक नहीं पहुंचा।
बेटियों ने दिखाई हिम्मत
मां की मौत के बाद दोनों बेटियों ने हिम्मत जुटाई। उन्होंने जैसे-तैसे अंतिम संस्कार की व्यवस्था की और समाज की परवाह किए बिना खुद ही मां को मुखाग्नि दी। गांव वालों का कहना है कि परिवार बहुत गरीब था और लंबे समय से समाज से कटा हुआ था, इसलिए कोई मदद के लिए आगे नहीं आया।
तेरहवीं के लिए नहीं हैं पैसे
अंतिम संस्कार तो किसी तरह हो गया, लेकिन अब सबसे बड़ी परेशानी तेरहवीं और श्राद्ध की है। दोनों बेटियों के पास न तो पैसे हैं और न ही कोई सहारा। वे गांव वालों के साथ-साथ प्रशासन से भी मदद की गुहार लगा रही हैं। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन और समाज समय पर आगे आए, तो इन दोनों बेटियों को थोड़ी राहत मिल सकती है। यह मामला सिर्फ एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज की संवेदनहीनता को उजागर करता है।
बड़ा सवाल
यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ जाती है, क्या गरीबी इतनी बड़ी गलती है कि इंसान मरने के बाद भी उसे सम्मान न मिले?
