'विपक्ष अपनी शर्तें थोपना चाहता था', स्पीकर पद पर आम सहमति नहीं बन पाने पर बोले पीयूष गोयल
punjabkesari.in Tuesday, Jun 25, 2024 - 04:02 PM (IST)

नेशनल डेस्क : लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए आम सहमति बनाने में विफल रहने के बाद भारतीय जनता पार्टी के सांसद पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि जब राजनाथ सिंह ने कोशिश की तो कांग्रेस ने पहले उपसभापति पद तय करने की शर्त रख दी। पीयूष गोयल ने कहा कि उनकी पार्टी इस तरह की राजनीति की निंदा करती है।
गोयल ने कहा, "एनडीए के सभी दलों से चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि ओम बिरला को लोकसभा का अध्यक्ष चुना जाना चाहिए। सुबह राजनाथ सिंह जी मल्लिकार्जुन खरगे जी से चर्चा करना चाहते थे, लेकिन वे व्यस्त थे, इसलिए उन्होंने कहा कि वेणुगोपाल जी आपसे बात करेंगे। लेकिन टीआर बालू और केसी वेणुगोपाल जी से बात करने के बाद उन्होंने शर्त रखी कि पहले तय करें कि लोकसभा का उपाध्यक्ष कौन होगा और फिर अध्यक्ष के लिए समर्थन दिया जाएगा, हम इस प्रकार की राजनीति की निंदा करते हैं।"
अध्यक्ष पूरे सदन का होता है, न कि सत्ता पक्ष या विपक्ष का- गोयल
उन्होंने आगे कहा कि यह अच्छी परंपरा है कि यदि लोकसभा सर्वसम्मति से और निर्विरोध अध्यक्ष चुनती तो सदन की गरिमा बनी रहती और सभी दलों का भी योगदान होता। पीयूष गोयल ने कहा, "जिस तरह अध्यक्ष पूरे सदन का होता है, न कि सत्ता पक्ष या विपक्ष का, उसी तरह उपाध्यक्ष भी पूरे सदन का होता है। यह लोकसभा की परंपरा के अनुरूप नहीं है कि उपाध्यक्ष किसी विशेष पार्टी से हो।"
#WATCH | On INDIA bloc fielding K Suresh for Lok Sabha post, Union Minister and BJP MP Piyush Goyal says, "...In the morning, Rajnath Singh ji wanted to discuss with Mallikarjun Kharge ji but he was busy so he said that Venugopal ji would talk to you. But after speaking with TR… https://t.co/dnzguZc2xy pic.twitter.com/amqszMqX5v
— ANI (@ANI) June 25, 2024
लोकतंत्र शर्तों पर नहीं चलता- ललन सिंह
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "मल्लिकार्जुन खरगे वरिष्ठ नेता हैं और मैं उनका सम्मान करता हूं। कल से मेरी उनसे तीन बार बातचीत हो चुकी है।" जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री ललन सिंह ने कहा कि लोकतंत्र शर्तों पर नहीं चलता। ललन सिंह ने कहा, "केसी वेणुगोपाल और टीआर बालू आए थे। उन्होंने रक्षा मंत्री से बात की। रक्षा मंत्री ने एनडीए की तरफ से लोकसभा अध्यक्ष के उम्मीदवार के बारे में जानकारी दी और समर्थन मांगा। वेणुगोपाल ने कहा कि डिप्टी स्पीकर का नाम स्वीकार किया जाना चाहिए। रक्षा मंत्री ने कहा कि जब चुनाव आएगा, तो हम मिल-बैठकर चर्चा करेंगे... वे अपनी शर्त पर अड़े रहे। 'शर्तों के आधार पर वो लोकतंत्र चलाना चाहते हैं, दबाव की राजनीति करना चाहते हैं... लोकतंत्र में ये नहीं चलता है।"
अध्यक्ष पद पर नही बनी आम सहमति
इस बीच, 18वीं लोकसभा के अध्यक्ष पद पर आम सहमति बनाने के लिए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के प्रयास तब विफल हो गए जब भारतीय जनता पार्टी ने इस पद के लिए 8 बार के सांसद के सुरेश को मैदान में उतारने का फैसला किया। इस पद के लिए भाजपा के कोटा सांसद ओम बिरला द्वारा नामांकन दाखिल करने के बाद उनका नामांकन हुआ। बिड़ला 17वीं लोकसभा में भी अध्यक्ष थे।
पहली बार अध्यक्ष के लिए चुनाव होंगे
यह पहली बार होगा जब निचले सदन के अध्यक्ष के लिए चुनाव होंगे। आजादी के बाद से, लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आम सहमति से होता रहा है। इस पद के लिए चुनाव 26 जून को होंगे। 543 सदस्यीय लोकसभा में एनडीए के पास 293 सांसद हैं और उसे स्पष्ट बहुमत प्राप्त है, जबकि विपक्षी दल इंडिया ब्लॉक के पास 234 सांसद हैं।