Night Sweats: नींद में ज्यादा पसीना आना, इन गंभीर बीमारी का संकेत! कैसे करें बचाव और क्या हैं उपाय?
punjabkesari.in Thursday, Feb 26, 2026 - 07:53 AM (IST)
नेशनल डेस्क: नींद में पसीना आना महज गर्मी का अहसास नहीं, बल्कि आपके शरीर द्वारा दिया जा रहा एक 'अलार्म' हो सकता है। अक्सर हम रात को पसीने से भीगने पर कमरे का तापमान बढ़ा देते हैं या पंखा तेज कर लेते हैं, लेकिन मेडिकल साइंस की भाषा में इसे 'नाइट स्वेट्स' (Night Sweats) कहा जाता है, जो स्वास्थ्य से जुड़ी गहरी समस्याओं का इशारा हो सकता है। अगर ठंडे माहौल में भी आपके कपड़े और बिस्तर पसीने से तर-बतर हो रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज करना भविष्य में किसी बड़ी बीमारी को न्योता देने जैसा है।
क्यों आती है नींद में पसीने की समस्या?
रात के समय अत्यधिक पसीना आने के पीछे कई गंभीर चिकित्सीय कारण हो सकते हैं। सबसे प्रमुख कारणों में हाइपरथायरायडिज्म शामिल है, जिसमें थायरॉइड ग्रंथि अत्यधिक हार्मोन बनाने लगती है और शरीर का मेटाबॉलिज्म असंतुलित होने से गर्मी ज्यादा महसूस होती है। इसके अलावा, डायबिटीज के मरीजों के लिए यह एक चेतावनी है; जब नींद के दौरान अचानक ब्लड शुगर लेवल गिर जाता है (हाइपोग्लाइसीमिया), तो शरीर पसीने के जरिए प्रतिक्रिया देता है।
महिलाओं में हार्मोनल बदलाव, विशेषकर मेनोपॉज के दौरान, यह समस्या काफी आम है। वहीं, मानसिक स्वास्थ्य भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। अत्यधिक तनाव, चिंता (Anxiety) और घबराहट के कारण दिल की धड़कन तेज हो जाती है, जिससे रात में पसीना आने लगता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पसीने के साथ-साथ आपको कमजोरी, बेचैनी या वजन घटने जैसे लक्षण दिख रहे हैं, तो यह शरीर के अंदर पनप रही किसी बड़ी गड़बड़ी का संकेत हो सकता है।
कैसे करें बचाव और क्या हैं उपाय?
इस समस्या से राहत पाने के लिए जीवनशैली में कुछ बुनियादी बदलाव बेहद जरूरी हैं। सबसे पहले अपने सोने के कमरे का तापमान संतुलित रखें और सिंथेटिक कपड़ों के बजाय सूती और आरामदायक कपड़े पहनें। खान-पान पर ध्यान देना भी अनिवार्य है; रात को सोने से पहले अधिक मसालेदार या भारी भोजन से परहेज करें, क्योंकि यह शरीर की गर्मी बढ़ा सकता है।
तनाव को कम करने के लिए नियमित रूप से ब्रीदिंग एक्सरसाइज (गहरी सांस लेना) और योग का सहारा लें, जिससे दिमाग शांत रहता है और नींद की गुणवत्ता सुधरती है। यदि आप पहले से ही शुगर या थायरॉइड के मरीज हैं, तो अपनी दवाओं का नियमन करें और डॉक्टर से परामर्श लेकर शुगर लेवल की जांच कराते रहें। याद रखें, शरीर के इन छोटे संकेतों को समय पर पहचानना ही आपको भविष्य की गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रख सकता है।
