तिरुचि-करूर-कोयंबटूर के बीच बनेगा नया फोर-लेन ग्रीनफील्ड हाईवे, DPR तैयार करेगा NHAI

punjabkesari.in Thursday, Mar 19, 2026 - 07:47 PM (IST)

नेशनल डेस्क:  भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने तमिलनाडु के मध्य और पश्चिमी हिस्सों की सूरत बदलने वाली एक महात्वाकांक्षी सड़क परियोजना का बिगुल फूंक दिया है। तिरुची से कोयंबटूर तक के सफर को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए NHAI ने लगभग 230 किलोमीटर लंबे एक नए चार-लेन 'ग्रीनफील्ड राजमार्ग' और तिरुची के लिए एक विशेष 'उत्तरी बाईपास' के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं। इस पूरी योजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए अब नए सिरे से सलाहकारों से निविदाएं मांगी गई हैं।

हादसों के सफर से मिलेगी मुक्ति

इस परियोजना का एक सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा तिरुची और करूर के बीच का वह खतरनाक रास्ता है, जहां वर्तमान में कावेरी नदी और रेलवे लाइनों की भौगोलिक बाधाओं के कारण सड़क चौड़ीकरण लगभग असंभव है। जेयापुरम और कुलिथलाई जैसे इलाकों से गुजरने वाला मौजूदा मार्ग संकरा और दुर्घटना-संभावित है, जहाँ आए दिन जानलेवा हादसे होते हैं। साल 2019 में भी इस 70 किलोमीटर के खंड को लेकर योजना बनी थी, लेकिन वह ठंडे बस्ते में चली गई थी। अब नई DPR के माध्यम से एक सुरक्षित और वैकल्पिक 'ग्रीनफील्ड' रास्ता तैयार किया जाएगा, जो पुराने ब्लैक-स्पॉट्स को पीछे छोड़ते हुए सीधा और तेज़ संपर्क प्रदान करेगा।

तिरुची को मिलेगा 'उत्तरी बाईपास' का तोहफा

शहर के भीतर बढ़ते ट्रैफिक के बोझ को कम करने के लिए इस प्रोजेक्ट में एक 'उत्तरी बाईपास' का प्रस्ताव भी शामिल है। यह बाईपास तिरुची के उत्तरी उपनगरों को कवर करेगा और कावेरी नदी पर एक ऊंचे पुल के माध्यम से कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह नया बाईपास मौजूदा 'थुवाकुडी-जेयापुरम सेमी-रिंग रोड' से बिल्कुल अलग होगा। यह प्रस्तावित मार्ग तिरुची-चेन्नई राष्ट्रीय राजमार्ग को क्रॉस करते हुए नमक्कल और चिदंबरम जैसे प्रमुख शहरों की ओर जाने वाले रास्तों को आपस में जोड़ेगा।

विशेषज्ञों की निगरानी में होगा काम

नई दिल्ली स्थित NHAI मुख्यालय की देखरेख में तैयार होने वाली इस DPR के लिए जो सलाहकार नियुक्त किया जाएगा, उसकी जिम्मेदारी केवल नक्शा बनाना ही नहीं बल्कि मिट्टी के परीक्षण, यातायात के गहन अध्ययन और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण करना भी होगा। लगभग 37 किलोमीटर का वह हिस्सा, जो कुदामुरुत्ती ब्रिज से लेकर पेट्टावैथलाई तक फैला है और बेहद संवेदनशील माना जाता है, उसे इस नई योजना में विशेष प्राथमिकता दी जा रही है।


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Content Editor

Anu Malhotra

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