मोदी सरकार ने कुप्रबंधन से छोटे व्यवसायों और अनौपचारिक क्षेत्र को बर्बाद कर दिया: खरगे
punjabkesari.in Monday, Jun 24, 2024 - 08:17 PM (IST)

नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने नोटबंदी, ‘त्रुटिपूर्ण' जीएसटी और आर्थिक ‘कुप्रबंधन' जैसे कदमों से छोटे व्यवसायों और अनौपचारिक क्षेत्र को बर्बाद कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को प्रचार-प्रसार पर ध्यान देने के बजाय ‘आर्थिक गड़बड़ी' की वास्तविकता की ओर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
7 वर्षों में 54 लाख नौकरियां खत्म हो गई हैं
खरगे ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मोदी सरकार द्वारा नोटबंदी, त्रुटिपूर्ण जीएसटी और महामारी के दौरान कुप्रबंधन के जरिए किये गये हमलों ने हमारे छोटे व्यवसायों, एमएसएमई और अनौपचारिक क्षेत्र की इकाइयों को बर्बाद कर दिया है। अनिगमित क्षेत्र में पिछले सात वर्षों में 54 लाख नौकरियां खत्म हो गई हैं! मोदी सरकार का अपना आंकड़ा हमें यह बताता है।''उन्होंने दावा किया कि तथ्य यह है कि मोदी सरकार के 10 साल में 2.5 करोड़ एमएसएमई बंद हो गए और 72 प्रतिशत एमएसएमई जो 12 करोड़ नौकरियां प्रदान करते हैं, उनमें शून्य वृद्धि देखी गई।
Repeated attacks by Demonetisation, Flawed GST and Mismanagement during pandemic by the Modi Govt have ruined our small businesses, MSMEs and the informal sector units!
— Mallikarjun Kharge (@kharge) June 24, 2024
54 Lakh Jobs have been lost in the past 7 years in the Unincorporated Sector! Modi Govt's own data tells us… pic.twitter.com/cbK47xhp0d
GST स्लैब ने हमारे MSME को पंगु बना दिया
खरगे ने कहा, ‘‘कई जीएसटी स्लैब ने हमारे एमएसएमई को पंगु बना दिया है। ऐसे छोटे व्यवसायों के लिए प्रोत्साहन और जागरूकता की कमी ने भी इस तबाही को बढ़ा दिया है। कृषि क्षेत्र की कम से कम 35 वस्तुएं जिन पर जीएसटी लगाया गया है, उससे हमारे किसानों की आय कम हो गई है। आवश्यक वस्तुओं और खाद्य पदार्थों पर जीएसटी ने घरेलू बचत को 50 साल के निचले स्तर पर पहुंचा दिया है।''
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि इस स्थिति के बावजूद स्वघोषित ‘‘नॉन बायोलॉजिकल'' प्रधानमंत्री का दावा है कि जीएसटी के उनके संस्करण से उपभोक्ताओं को लाभ हुआ है। खरगे ने कहा, ‘‘मोदी जी, जनादेश आपके खिलाफ है। अब समय आ गया है, आपकी सरकार अपने प्रचार प्रसार से हटकर इस आर्थिक गड़बड़ी की वास्तविकता को देखे।''