ईरानी जहाज डूबने पर जयराम रमेश ने केंद्र को घेरा, कहा - इतनी डरपोक सरकार कभी नहीं देखी
punjabkesari.in Thursday, Mar 05, 2026 - 01:49 PM (IST)
नेशनल डेस्क: हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत 'IRIS Dena' को डुबोए जाने की घटना ने भारत में एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस मामले पर केंद्र सरकार की चुप्पी को आड़े हाथों लेते हुए इसे अब तक की सबसे डरपोक और भयभीत सरकार करार दिया है।
साख और सुरक्षा पर गंभीर असर
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर सरकार के रुख की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कार्रवाई के भारत के लिए बेहद गंभीर निहितार्थ हैं, लेकिन ताज्जुब है कि अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मोदी सरकार ने ईरान में हुए लक्षित हमलों पर भी खामोशी नहीं तोड़ी थी, जिससे यह सरकार रणनीतिक रूप से कमजोर नजर आ रही है।
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भारतीय नौसेना का प्रमुख बहुपक्षीय अभ्यास MILAN पहली बार 1995 में आयोजित किया गया था। इसका 13वां संस्करण 19 फरवरी से 25 फरवरी 2026 तक विशाखापट्टनम में आयोजित हुआ, जिसमें अमेरिका और ईरान सहित अन्य देशों के 18 युद्धपोतों ने भाग लिया। इस अभ्यास का उद्घाटन रक्षा मंत्री ने किया था।…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) March 5, 2026
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MILAN 2026 का दिया हवाला
जयराम रमेश ने याद दिलाया कि 19 से 25 फरवरी 2026 तक विशाखापत्तनम में आयोजित भारतीय नौसेना के प्रतिष्ठित 'मिलन' (MILAN) अभ्यास में अमेरिका और ईरान, दोनों ने अपने युद्धपोतों के साथ हिस्सा लिया था। इस अभ्यास का उद्घाटन स्वयं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था। अभ्यास खत्म होने के कुछ ही दिनों बाद, श्रीलंका के गॉल से लगभग 40 समुद्री मील दूर अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा उसी ईरानी जहाज को डुबो दिया गया जो भारत का मेहमान बनकर आया था। रमेश ने इसे "असाधारण और चिंताजनक" बताया।

राहुल गांधी ने भी दी कड़ी प्रतिक्रिया
इससे पहले राहुल गांधी ने भी पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि पश्चिम एशिया का युद्ध अब हमारे घर तक पहुंच गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव से भारत की 40% तेल और गैस आपूर्ति ठप हो सकती है।
त्रासदी का मंजर
श्रीलंका की नौसेना ने गॉल के दक्षिण में चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में अब तक 87 शव बरामद किए हैं। जहाज पर करीब 180 लोग सवार थे, जिनमें से केवल 32 लोगों को बचाया जा सका है। ईरान ने इसे "समुद्र में किया गया अत्याचार" बताया है और अमेरिका को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
