भारत में गरजे अमेरिकी विदेश मंत्री, “दुनिया में ईरान से बड़ा आतंक का सरपरस्त कोई नहीं”
punjabkesari.in Sunday, May 24, 2026 - 03:26 PM (IST)
International Desk: भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने नई दिल्ली में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ईरान पर बेहद तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसा कोई देश नहीं है जो ईरान जितना आतंकवाद को बढ़ावा देता हो। रुबियो ने आरोप लगाया कि ईरान लगातार आतंकवादी संगठनों और प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन देता है। उन्होंने कहा कि ये संगठन किसी की जान की परवाह नहीं करते और जहां मौका मिलता है वहां हमला कर देते हैं।उन्होंने कहा कि ईरान ने अपने करोड़ों डॉलर देश की जनता की भलाई, सड़कें या विकास पर खर्च करने के बजाय हिजबुल्लाह और हमास जैसे संगठनों पर लगाए। रुबियो के मुताबिक यही वजह है कि ईरान की अर्थव्यवस्था कमजोर हुई और वहां के लोग लगातार विरोध प्रदर्शन करते रहते हैं।
रुबियो ने दावा किया कि ईरान समर्थित हिजबुल्लाह ने अर्जेंटीना में यहूदी केंद्र पर हमला किया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान ने सड़क किनारे बम (IED) तकनीक को बढ़ावा दिया, जिससे अमेरिकी सैनिकों समेत कई लोग मारे गए। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान दुनिया भर में असहमति रखने वालों और विरोधियों की हत्या तथा हत्या की कोशिशों में शामिल रहा है। उन्होंने कहा, “ईरान सिर्फ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर अस्थिरता फैलाने वाला देश है।”रुबियो ने होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों में बारूदी सुरंगें बिछाईं और कई नागरिक जहाजों को रोके रखा। उन्होंने कहा कि इससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ा है।
हालांकि इतने तीखे आरोपों के बावजूद रुबियो ने कहा कि अमेरिका अब भी कूटनीतिक समाधान चाहता है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन शांति के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहता है, लेकिन ईरान को कभी परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। रुबियो ने संकेत दिए कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में “महत्वपूर्ण प्रगति” हुई है। उन्होंने कहा कि अगले कुछ घंटों में दुनिया को “अच्छी खबर” मिल सकती है। माना जा रहा है कि यह बयान होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने और संभावित युद्धविराम समझौते से जुड़ा हो सकता है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar भी मौजूद थे। दोनों नेताओं ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की।
