मौत का वो आधा घंटा! पाइप निकालने दो सफाईकर्मी उतरे सीवर टैंक के अंदर और फिर...

punjabkesari.in Tuesday, Mar 03, 2026 - 10:08 AM (IST)

Indore Sewer Tank Tragedy : स्वच्छता में नंबर-1 शहर इंदौर से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। सोमवार शाम चोइथराम सब्जी मंडी क्षेत्र में सीवर लाइन की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से नगर निगम के दो जांबाज कर्मचारियों, करण यादव और अजय यादव की जान चली गई। यह हादसा उस वक्त हुआ जब सुरक्षा उपकरणों के अभाव में एक कर्मचारी दूसरे को बचाने के लिए टैंक में उतरा था। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों को 30-30 लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की घोषणा की है।

कैसे हुआ हादसा: मौत का वो आधा घंटा

राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र स्थित चोइथराम मंडी गेट के पास शाम करीब 6:30 बजे नियमित सफाई का काम चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जांच के अनुसार सक्शन मशीन से सफाई के दौरान पाइप का एक हिस्सा 25-30 फीट गहरे टैंक में गिर गया। उसे निकालने के लिए एक कर्मचारी बिना किसी ऑक्सीजन मास्क या सुरक्षा बेल्ट के नीचे उतरा और जहरीली गैस (मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड) के कारण तुरंत बेहोश हो गया। अपने साथी को तड़पता देख दूसरा कर्मचारी उसे बचाने के लिए नीचे कूदा लेकिन वह भी गैस का शिकार हो गया। ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण दोनों की मौके पर ही मौत हो गई।

प्रशासनिक हलचल और रेस्क्यू ऑपरेशन

हादसे के बाद मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने रस्सी के सहारे नीचे उतरने की कोशिश की लेकिन गैस इतनी जहरीली थी कि वे भी प्रभावित होने लगे। सूचना मिलते ही पुलिस और नगर निगम की रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद दोनों के शवों को बाहर निकाला गया। नगर निगम कमिश्नर और मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने घटनास्थल का मुआयना किया और मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

यह भी पढ़ें: 'नागरिकों इसी वक्त देश छोड़ दो...' इस एक एडवाइजरी ने हिला दी पूरी दुनिया, इन 14 देशों में...

सुरक्षा मानकों की धज्जियां: आखिर जिम्मेदार कौन?

यह हादसा इंदौर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है:

  • सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी: कोर्ट के सख्त निर्देश हैं कि किसी भी स्थिति में बिना सुरक्षा उपकरणों (गैस डिटेक्टर, ऑक्सीजन सिलेंडर, सेफ्टी हार्नेस) के कर्मचारी सीवर में नहीं उतरेगा।

  • उपकरणों का अभाव: मौके पर मौजूद कर्मचारियों के पास गैस का स्तर जांचने के लिए कोई मशीन नहीं थी।

  • लापरवाही: क्या सुपरवाइजर ने कर्मचारियों को बिना किट के अंदर जाने की अनुमति दी? पुलिस अब इसी पहलू की जांच कर रही है।

यह भी पढ़ें: आज आसमान में दिखेगा 'Blood Moon', शुरू हुआ 9 घंटे का सूतक काल! जानें भारत में कितने बजे लगेगा साल का पहला चंद्र ग्रहण?

मुआवजा और आगे की कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स का पालन करते हुए दोनों मृतकों के परिजनों को 30-30 लाख रुपये देने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने मर्ग कायम कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं कि "आखिर कब तक सफाईकर्मी इस तरह अपनी जान गंवाते रहेंगे?"


सबसे ज्यादा पढ़े गए

Content Editor

Rohini Oberoi

Related News