सेमीकंडक्टर मिशन पर पीएम मोदी का बड़ा बयान- भारत बनेगा दुनिया का भरोसेमंद सप्लायर
punjabkesari.in Tuesday, Mar 31, 2026 - 06:40 PM (IST)
नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि 21वीं सदी अपने साथ कई चुनौतियां लेकर आई है और संघर्षों के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित हुई हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकार आने वाले दशकों के लिए प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सुरक्षा की एक मज़बूत नींव रख रही है। मोदी ने साणंद में केन्स सेमीकॉन के 'आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर' संयंत्र का उद्घाटन किया और इसके साथ ही वहां उत्पादन शुरू हो गया। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक बाज़ार में एक भरोसेमंद विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के तौर पर अपनी भूमिका को मज़बूत कर रहा है। उन्होंने कहा कि एक तरह से आज साणंद और सिलिकॉन वैली के बीच एक नया सेतु बन गया है। मोदी ने इस अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत सक्रिय रूप से एक मज़बूत सेमीकंडक्टर तंत्र का निर्माण कर रहा है और साथ ही कच्चे माल के लिए एक लचीली आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास कर रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि जब कोविड महामारी ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को बाधित किया तो भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण का केंद्र बनने का निर्णय लिया।

प्रधानमंत्री ने कहा, ''भारत सक्रिय रूप से एक मज़बूत सेमीकंडक्टर तंत्र बना रहा है और साथ ही कच्चे माल के लिए एक लचीली आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करने के लिए भी महत्वपूर्ण प्रयास कर रहा है। पैक्स सिलिका में भारत की भागीदारी इसी प्रयास का एक प्रमाण है। अपने वैश्विक भागीदारों के साथ मिलकर काम करते हुए हमारा लक्ष्य एक सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करना है।'' भारत हाल ही में 'पैक्स सिलिका' में शामिल हुआ है। यह अमेरिका के नेतृत्व वाला एक रणनीतिक गठबंधन है जिसे दिसंबर 2025 में महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुरक्षित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था जिसमें सेमीकंडक्टर, एआई और दुर्लभ मृदा तत्वों पर विशेष ध्यान दिया गया है। मोदी ने कहा, ''इसके अलावा, महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए भारत ने 'राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन' शुरू किया है।'' उन्होंने यह भी कहा कि यह मिशन महत्वपूर्ण खनिजों के खनन और उत्पादन पर ज़ोर देता है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि खनिजों के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने के लिए 1,500 करोड़ रुपये की एक योजना शुरू की गई है। मोदी ने इस साल के बजट में 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' की घोषणा का ज़िक्र किया, जिसमें ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल जैसे तटीय राज्य शामिल हैं। उन्होंने कहा, ''यह कॉरिडोर एक एकीकृत नेटवर्क के रूप में कार्य करेगा, जो खनन, शोधन और विनिर्माण तक फैली एक सुदृढ़ मूल्य श्रृंखला का निर्माण करेगा। हमारा उद्देश्य देश के भीतर महत्वपूर्ण खनिजों का एक राष्ट्रीय भंडार स्थापित करना है।''

प्रधानमंत्री ने कहा, ''बहुत अच्छा होता अगर यह पहल 30 या 40 साल पहले शुरू हो गई होती; फिर भी, भारत अब इस लक्ष्य को एक समर्पित 'मिशन मोड' में आगे बढ़ा रहा है।'' मोदी ने कहा कि भारत का मानना है कि 21वीं सदी केवल आर्थिक प्रतिस्पर्धा का दौर ही नहीं, बल्कि भविष्य के प्रौद्योगिकी परिदृश्य को आकार देने का एक निर्णायक क्षण भी है। उन्होंने कहा, ''ठीक इसी वजह से, मैं इस दशक को भारत का 'टेकएड' कहता हूँ। इस दशक में भारत प्रौद्योगिकी से जुड़ी जो भी पहल कर रहा है, वे आने वाले समय में भारत के नेतृत्व को और मज़बूत करेंगी।'' यह उल्लेख करते हुए कि एआई को अपनाने के मामले में भारत दुनिया में सबसे आगे है, मोदी ने कहा कि भारतीय लोग प्रौद्योगिकी को अपनाते हैं, और 'डिजिटल इंडिया' की सफलता तथा फिनटेक के क्षेत्र में हो रहा बेहतरीन काम प्रौद्योगिकी में भारतीयों के भरोसे को दर्शाता है। उन्होंने कहा, ''हमारे सेमीकंडक्टर तंत्र के उभरने से भारत के एआई तंत्र को काफ़ी फ़ायदा होगा। 21वीं सदी का भारत सिर्फ़ बदलाव का साक्षी बनकर आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि उस बदलाव का नेतृत्व करने के पक्के इरादे के साथ आगे बढ़ रहा है। हमारी नीतियाँ और फ़ैसले आने वाले दशकों की प्रौद्योगिकी और ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक मज़बूत नींव रख रहे हैं।'' मोदी ने कहा कि भारत आज हर महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी क्षेत्र में अभूतपूर्व निवेश कर रहा है और सुधारों को आगे बढ़ा रहा है। साणंद में दूसरे सेमीकंडक्टर संयंत्र के उद्घाटन को ''गर्व का क्षण'' बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक बाज़ार में एक भरोसेमंद सेमीकंडक्टर आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी भूमिका को मज़बूत कर रहा है क्योंकि एक भारतीय कंपनी वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में शामिल हो गई है। उन्होंने कहा, ''एक तरह से, आज साणंद और सिलिकॉन वैली के बीच एक नया सेतु बन गया है; साणंद स्थित संयंत्र अब कैलिफ़ोर्निया की एक कंपनी को 'इंटेलिजेंट पावर मॉड्यूल्स' की आपूर्ति कर रहा है।''
मोदी ने कहा कि 21वीं सदी कई चुनौतियाँ लेकर आई है, और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को भारी नुकसान पहुँचा है, चाहे वे चिप हों, दुर्लभ खनिज हों या ऊर्जा; ये सभी संघर्षों से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा, ''ये पहल मानवता की तेज़ प्रगति से गहराई से जुड़ी हुई हैं। आपूर्ति श्रृंखला या उनके प्रवाह में कोई भी रुकावट पूरी मानव जाति के विकास पर असर डालती है। इसलिए, यह बेहद ज़रूरी है कि पूरी दुनिया के विकास के लिए, भारत जैसा एक लोकतांत्रिक देश इस दिशा में आगे बढ़े।'' मोदी ने कहा कि 2021 में भारत ने 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन' शुरू किया जो न केवल एक औद्योगिक नीति है, बल्कि भारत के आत्मविश्वास की एक घोषणा भी है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''इस मिशन के तहत, दस राज्यों में 1.60 लाख करोड़ रुपये के कार्य किए जा रहे हैं। भारत ने पिछले बजट में 'सेमीकंडक्टर मिशन 2' की शुरुआत की थी, ताकि भारत अपने उत्पादन के हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।''

मोदी ने कहा कि भारत भविष्य के लिए तैयार कुशल कार्यबल तैयार करने के वास्ते उद्योग-आधारित अनुसंधान और प्रशिक्षण को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा, ''बहुत जल्द, देश में 85,000 से अधिक डिज़ाइन पेशेवर तैयार हो जाएँगे। इसके अतिरिक्त, पूरे तंत्र को देखते हुए, पेशेवरों को प्रशिक्षित करने की व्यवस्था की जा रही है।'' प्रधानमंत्री ने कहा, ''सेमीकंडक्टर डिज़ाइन को बढ़ावा देने के लिए 'चिप्स-टू-स्टार्टअप' कार्यक्रम जारी है। 400 से ज़्यादा विश्वविद्यालयों और स्टार्ट-अप को उन्नत डिज़ाइन उपकरणों तक पहुँच दी गई है।''
उद्योग के अनुमानों का हवाला देते हुए मोदी ने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर बाज़ार 4.5 लाख करोड़ रुपये का है, जिसके 9 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, ''इससे पता चलता है कि इस क्षेत्र में कितनी क्षमता है। हमारा लक्ष्य अपनी ज़रूरत के ज़्यादातर चिप भारत में ही बनाना है। भारत के इस संकल्प के प्रति वैश्विक निवेशकों का उत्साह हमारे लिए एक बड़ी पूंजी है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत कारोबार करने में सुगमता, विनिर्माण और साजो-सामान के अलावा, विकास एवं प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल-दोनों ही दिशाओं में काम कर रहा है।
