RBI New Rules: गोल्ड लिमिट! बैंक लॉकर में कितना सोना रख सकते हैं आप? जान लें RBI का ये जरूरी नियम
punjabkesari.in Saturday, Nov 01, 2025 - 03:16 PM (IST)
नेशनल डेस्क: भारत में सोना न सिर्फ आभूषण या निवेश का साधन है, बल्कि सुरक्षा और परंपरा का प्रतीक भी माना जाता है। हर घर में किसी न किसी रूप में सोना जरूर होता है कोई इसे गहनों के रूप में रखता है, तो कोई सिक्कों या बार के रूप में निवेश करता है। लेकिन सोने को सुरक्षित रखना हमेशा चिंता का विषय रहता है। ऐसे में बैंक लॉकर एक भरोसेमंद विकल्प साबित होता है। बैंक अपने ग्राहकों को लॉकर सुविधा देता है, जहां वे सोना, गहने या अन्य कीमती सामान सुरक्षित रख सकते हैं। लेकिन सवाल उठता है क्या बैंक लॉकर में सोना रखने की कोई सीमा तय है।
घर में कितना सोना रख सकते हैं?
भारत के आयकर अधिनियम के अनुसार, हर व्यक्ति के लिए घर में सोना रखने की एक तय सीमा है
➤ विवाहित महिला: 500 ग्राम तक सोना रख सकती हैं।
➤ अविवाहित महिला: 250 ग्राम तक सोना रख सकती हैं।
पुरुष: 100 ग्राम तक सोना रखने की अनुमति है।
इसका मतलब यह है कि अगर एक विवाहित पुरुष और महिला एक घर में रहते हैं, तो दोनों के पास कुल मिलाकर 600 ग्राम सोना हो सकता है। अगर आपके पास इससे ज्यादा सोना है और आपने उसे कानूनी रूप से खरीदा है (यानी आपके पास खरीद की रसीद या बिल है), तो टैक्स विभाग आपसे कोई सवाल नहीं करेगा।
बैंक लॉकर में सोना रखने की सीमा क्या है?
अब सबसे अहम सवाल — क्या बैंक लॉकर में सोना रखने की कोई सीमा है?
➤ भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंक लॉकर में रखे जा सकने वाले सोने की कोई अधिकतम सीमा तय नहीं की है।
➤ यानि आप अपने बैंक लॉकर में जितना चाहें उतना सोना रख सकते हैं।
➤ यह पूरी तरह आपकी जरूरत और बैंक की नीतियों पर निर्भर करता है।
RBI के नियम क्या कहते हैं?
RBI के नियमों के मुताबिक
बैंक को यह पूछने का अधिकार नहीं है कि आपने लॉकर में क्या रखा है।
➤ बैंक तभी दखल दे सकता है जब यह साबित हो कि आपने अवैध वस्तु (Illegal Item) लॉकर में रखी है।
➤ बैंक आपके लॉकर की सुरक्षा और गोपनीयता (Privacy) बनाए रखने का जिम्मेदार है।
➤ RBI ने बैंकों को यह भी निर्देश दिया है कि अगर बैंक की गलती से लॉकर में रखी चीजों को नुकसान होता है, तो बैंक को ग्राहक को मुआवज़ा (Compensation) देना होगा।
बैंक लॉकर की अन्य शर्तें
➤ बैंक हर साल लॉकर किराया (Locker Rent) लेता है, जो शाखा और लॉकर के आकार के अनुसार अलग-अलग होता है।
➤ ग्राहकों को लॉकर एग्रीमेंट (Locker Agreement) पर साइन करना होता है।
➤ लॉकर का उपयोग केवल उसी व्यक्ति को करने की अनुमति होती है जिसका नाम रजिस्टर में दर्ज है।
➤ बैंक समय-समय पर लॉकर की स्थिति की जांच भी कर सकता है।
