8th Pay Commission: इस राज्य ने दी बड़ी खुशखबरी, 8वें वेतन आयोग का गठन, किसे मिलेगा लाभ और कौन रहेगा दायरे से बाहर?
punjabkesari.in Wednesday, Feb 25, 2026 - 09:29 AM (IST)
नेशनल डेस्क: असम सरकार ने 8th Pay Commission के गठन के साथ देश के अन्य राज्यों के मुकाबले बढ़त बना ली है। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma की इस पहल ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए खुशियों का रास्ता साफ कर दिया है। जहां केंद्र में अभी 8th Pay Commissio पर चर्चाएं ही चल रही हैं, वहीं असम ने विधिवत रूप से सुभाष चंद्र दास की अध्यक्षता में 8th Assam Pay Commission 2026 गठित कर दिया है। यह कदम राज्य के करीब 7 लाख कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए किसी बड़े वित्तीय उपहार से कम नहीं है।
आयोग की संरचना और मुख्य उद्देश्य
असम के वित्त विभाग ने इस आयोग के गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। सेवानिवृत्त IAS अधिकारी सुभाष चंद्र दास को इस महत्वपूर्ण आयोग की कमान सौंपी गई है। उनके साथ वित्त, कार्मिक और न्यायिक विभागों के वरिष्ठ सचिवों को शामिल किया गया है, जबकि गुवाहाटी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रतुल महंत भी इस टीम का हिस्सा होंगे।
Assam becomes the first state in India to form the 8th State Pay Commission. It’s a landmark move in government employee welfare. The commission will review pay, allowances, pensions, and service conditions, aiming for fair compensation while maintaining fiscal balance.
— 8th Pay Commission (आठवाँ वेतन आयोग) (@8th_CPC) January 2, 2026
केंद्र के… pic.twitter.com/77bVd218FU
आयोग का मुख्य काम केवल वेतन बढ़ाना नहीं है, बल्कि राज्य की आर्थिक स्थिति और राजकोषीय अनुशासन को संतुलित रखते हुए भत्तों और सेवा शर्तों की गहराई से समीक्षा करना है। सरकार ने इस बार डिजिटल तकनीक, प्रदर्शन आधारित शासन और उत्पादकता बढ़ाने जैसे आधुनिक पहलुओं पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
किसे मिलेगा लाभ और कौन रहेगा दायरे से बाहर?
भले ही यह खबर लाखों लोगों के लिए सुकून भरी है, लेकिन कुछ खास श्रेणियों को इस वेतन संशोधन के दायरे से बाहर रखा गया है। आयोग की शर्तो के अनुसार, अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी (IAS, IPS आदि) और न्यायिक सेवा अधिकारी इसके अंतर्गत नहीं आएंगे। इसके अतिरिक्त, जो कर्मचारी UGC या AICTE के वेतनमान के तहत आते हैं—जैसे कि डिग्री कॉलेजों, इंजीनियरिंग, मेडिकल, नर्सिंग, आयुर्वेदिक और फार्मेसी संस्थानों के साथ-साथ पॉलिटेक्निक के शिक्षक व तकनीकी कर्मचारी—वे भी इस नए वेतन आयोग के लाभ से बाहर रहेंगे। बाकी सभी राज्य कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए यह एक बड़ा बदलाव लेकर आएगा।
समय सीमा और भविष्य की तैयारी
असम सरकार ने स्पष्ट किया है कि पिछला वेतन संशोधन 1 अप्रैल 2016 को लागू हुआ था, इसलिए अब एक नई और व्यापक समीक्षा की तत्काल आवश्यकता है। आयोग को अपना मुख्यालय गुवाहाटी में बनाने और अगले 12 महीनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है। आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करते समय केंद्रीय वेतन आयोग के सुझावों और राज्य की विकासात्मक प्राथमिकताओं का भी ध्यान रखेगा। इस घोषणा ने राज्य के प्रशासनिक गलियारों में एक नई ऊर्जा भर दी है, क्योंकि असम अब वेतन सुधारों के मामले में पूरे देश के लिए एक उदाहरण पेश कर रहा है।
