8th Pay Commission से पहले कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, अब EPFO ने बहाल की हायर पेंशन की सुविधा
punjabkesari.in Monday, Feb 23, 2026 - 04:53 PM (IST)
नेशनल डेस्क: 8वें वेतन आयोग के गठन से पहले कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए इम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) के तहत हायर पेंशन की पुरानी सुविधा को फिर से लागू कर दिया है। इस निर्णय के बाद पात्र कर्मचारी अपनी वास्तविक बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) के आधार पर अधिक पेंशन योगदान का विकल्प चुन सकेंगे। इससे रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली मासिक पेंशन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो सकती है।
हायर पेंशन विकल्प क्या है
1 सितंबर 2014 से पहले कर्मचारियों को यह सुविधा दी जाती थी कि वे तय वेतन सीमा के बजाय अपनी पूरी बेसिक सैलरी पर पेंशन का योगदान करें। इस व्यवस्था में पेंशन योग्य वेतन अधिक माना जाता था, जिससे सेवानिवृत्ति के बाद ज्यादा पेंशन मिलती थी। हालांकि 1 सितंबर 2014 से नियमों में बदलाव करते हुए पेंशन योग्य वेतन की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये तय कर दी गई। इसके बाद वास्तविक वेतन के आधार पर पेंशन योगदान का विकल्प समाप्त कर दिया गया था। अब उसी पुराने प्रावधान को दोबारा बहाल किया गया है।
किन कर्मचारियों को होगा लाभ
यह सुविधा सभी कर्मचारियों के लिए लागू नहीं है। इसका लाभ केवल उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा जिन्होंने 1 सितंबर 2014 से पहले हायर पेंशन का विकल्प चुना था। खास तौर पर वे कर्मचारी जिनकी बेसिक सैलरी अधिक है और जो रिटायरमेंट के बाद ज्यादा मासिक पेंशन चाहते हैं, उन्हें इसका अधिक फायदा मिल सकता है। वरिष्ठ कर्मचारियों के लिए यह व्यवस्था अधिक उपयोगी मानी जा रही है, क्योंकि उनके लिए नियमित पेंशन की राशि एकमुश्त पीएफ से अधिक अहम हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि यह कोई नई योजना नहीं, बल्कि पहले से मौजूद प्रावधान की पुनर्बहाली है।
किन्हें नहीं मिलेगा फायदा
जिन कर्मचारियों ने 1 सितंबर 2014 के बाद नौकरी शुरू की है, वे इस हायर पेंशन सुविधा के पात्र नहीं होंगे। उनके लिए पेंशन योग्य वेतन की सीमा 15,000 रुपये ही लागू रहेगी। इसके अलावा वे कर्मचारी जिन्होंने पहले कभी वास्तविक वेतन पर पेंशन योगदान का विकल्प नहीं चुना था, वे भी इस सुविधा का लाभ नहीं ले पाएंगे। जो कर्मचारी 1 सितंबर 2014 से पहले रिटायर हो चुके थे और उस समय हायर पेंशन का विकल्प नहीं दिया था, वे भी इसके दायरे से बाहर रहेंगे।
वर्तमान में EPF और EPS का योगदान कैसे होता है
मौजूदा नियमों के अनुसार कर्मचारी और नियोक्ता दोनों बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते का 12 प्रतिशत हिस्सा EPF में जमा करते हैं। नियोक्ता के 12 प्रतिशत योगदान में से 8.33 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारी पेंशन स्कीम में जाता है, जबकि बाकी 3.67 प्रतिशत पीएफ खाते में जमा होता है। इसी EPS में जमा राशि के आधार पर रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली मासिक पेंशन तय की जाती है।
पेंशन की मौजूदा सीमा और संभावनाएं
2014 में लागू नियमों के तहत न्यूनतम मासिक पेंशन 1,000 रुपये निर्धारित है और पेंशन योग्य वेतन की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये तय की गई है। इस वजह से अधिकतम संभावित मासिक पेंशन 7,500 रुपये तक सीमित रहती है। लेकिन हायर पेंशन विकल्प के तहत यदि कर्मचारी अपनी पूरी बेसिक सैलरी पर योगदान करते हैं, तो उनकी पेंशन की गणना 15,000 रुपये की सीमा तक सीमित नहीं रहेगी और उन्हें अधिक पेंशन मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
क्यों अहम माना जा रहा है यह फैसला
2014 में वेतन सीमा लागू होने के बाद से हायर पेंशन को लेकर कर्मचारियों के बीच असमंजस और विवाद बना हुआ था। अब इस सुविधा की बहाली को उस लंबे समय से चली आ रही उलझन को सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कुल मिलाकर यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए फायदेमंद साबित होगा जिनकी आय अधिक है और जो सेवानिवृत्ति के बाद स्थिर और ज्यादा मासिक पेंशन चाहते हैं।
