Gold price increase: सोने-चांदी के भाव में हुई बढ़ोतरी, निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह
punjabkesari.in Monday, Oct 20, 2025 - 05:49 PM (IST)
नेशनल डेस्कः सोने और चांदी की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिली है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 5 दिसंबर की डिलीवरी वाले सोने का भाव 0.78 प्रतिशत बढ़कर ₹1,28,000 प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया है। वहीं चांदी में भी 0.39 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर इस हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी देखने को मिली है। सोमवार को 5 दिसंबर डिलीवरी वाले गोल्ड की कीमत 0.78 फीसदी की तेजी के साथ ₹1,28,000 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। वहीं, चांदी में भी मजबूती दर्ज की गई। 0.39 फीसदी की बढ़त के साथ चांदी की कीमत ₹1,57,213 प्रति किलोग्राम हो गई।
पिछले हफ्ते रिकॉर्ड स्तर पर सोना
पिछले सप्ताह MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाले गोल्ड में 4.65 फीसदी (₹5,644) की तेज उछाल देखी गई थी। शुक्रवार को सोना ₹1,32,294 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड उच्चतम स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, यह लगातार पांच दिनों की तेजी के बाद पहली गिरावट का दिन था।
चांदी के बाजार में भी उतार-चढ़ाव
चांदी के बाजार में भी उतार-चढ़ाव जारी है। बीते हफ्ते चांदी की कीमतों में 6.92 फीसदी यानी ₹10,138 प्रति किलो की जबरदस्त तेजी आई थी। भारत में चांदी की तेज़ मांग के चलते वैश्विक बाजारों, खासकर लंदन में चांदी की सप्लाई पर असर पड़ा है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इस त्योहारी सीजन में चांदी की भारी खरीदारी के चलते लंदन में सप्लाई संकट गहरा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर चांदी की मांग, विशेषकर सोलर इंडस्ट्री की बढ़ती ज़रूरतों के कारण, 678 मिलियन औंस तक सप्लाई से अधिक हो चुकी है।
देश के प्रमुख शहरों में आज का गोल्ड रेट
दिल्ली:
22 कैरेट – ₹1,19,990 / 10 ग्राम
24 कैरेट – ₹1,31,000 / 10 ग्राम
मुंबई:
22 कैरेट – ₹1,19,940 / 10 ग्राम
24 कैरेट – ₹1,30,850 / 10 ग्राम
चेन्नई:
22 कैरेट – ₹1,19,940 / 10 ग्राम
24 कैरेट – ₹1,30,850 / 10 ग्राम
कोलकाता:
22 कैरेट – ₹1,19,940 / 10 ग्राम
24 कैरेट – ₹1,30,850 / 10 ग्राम
विशेषज्ञों का मानना है कि इस सप्ताह सोने की कीमतें सीमित दायरे में कारोबार कर सकती हैं। हालिया रिकॉर्ड तेजी के बाद बाजार में मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिल सकता है।
गोल्ड पर असर डालने वाले मुख्य कारण:
- अमेरिकी फंडिंग बिल
- चीन और यूके के आर्थिक आंकड़े
- PMI डाटा
- फेडरल रिजर्व अधिकारियों के बयान
- 28-29 अक्टूबर को फेड की पॉलिसी मीटिंग
