मौत से पहले हर मरीज बोलता है ये 9 शब्द... ICU नर्स ने साझा किया चौंकाने वाला सच

punjabkesari.in Monday, Feb 23, 2026 - 10:31 AM (IST)

इंटरनेशनल डेस्क:  अस्पताल के सन्नाटे और मशीनों की 'बीप-बीप' के बीच एक ऐसी सरहद होती है, जहां डॉक्टरी पढ़ाई और महंगे टेस्ट्स सब धरे के धरे रह जाते हैं। अमेरिका के फ्लोरिडा की एक युवा नर्स, किर्स्टी रॉबर्ट्स, ने मौत के इसी रहस्यमयी चेहरे को बहुत करीब से देखा है। पिछले 4 सालों से आईसीयू (ICU) में तैनात किर्स्टी का कहना है कि जब कोई इंसान अपनी आखिरी सांसों की तरफ बढ़ता है, तो उसके भीतर एक ऐसा 'आध्यात्मिक बदलाव' आता है जिसे दुनिया का कोई भी स्कैनर या वेंटिलेटर नहीं पकड़ सकता।

मरीज खुद अपनी मौत की सटीक भविष्यवाणी कर देता है
किर्स्टी ने सोशल मीडिया पर उन अनकहे सच से पर्दा उठाया है, जो अक्सर लोग अपने आखिरी पलों में साझा करते हैं। सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि कई बार मरीज के मेडिकल पैरामीटर्स (Heart rate और BP) बिल्कुल सामान्य दिख रहे होते हैं और डॉक्टर भी उसे खतरे से बाहर मान रहे होते हैं, लेकिन मरीज खुद अपनी मौत की सटीक भविष्यवाणी कर देता है। नर्स के मुताबिक, मरते हुए इंसान को अपनी विदाई का पूर्वाभास हो जाता है। वह अक्सर घबराहट में नहीं, बल्कि एक अजीब सी शांति या स्पष्टता के साथ कहता है— "मुझे पता है कि मैं अब जाने वाला हूं।" इसके बाद वे अपने परिवार के लिए प्यार भरा संदेश देते हैं और कुछ ही देर में उनकी रूह शरीर छोड़ देती है।

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किर्स्टी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो में खुलासा किया कि मरीज अक्सर अपने परिवार से जुड़े शब्द कहते हैं। उन्होंने कहा, हर मरीज जो अपनी संसारिक यात्रा पुरी करके जाना वाला होता है, वही 9 शब्द कहता है – 'क्या आप मेरे परिवार से कह सकते हैं कि मैं उन्हें प्यार करता हूं?'

मरीजों के अंतिम शब्द और आध्यात्मिक बदलाव
किर्स्टी ने बताया कि इसके अलावा मरीज कभी-कभी कहते हैं, “मुझे अच्छा महसूस नहीं हो रहा” या “मुझे पता है मैं मरने वाला हूं।” यह सब सुनने के बाद भी उनके जीवन के संकेत सामान्य दिखते हैं – उनका Blood pressure, heartbeat और अन्य मेडिकल पैरामीटर ठीक रहते हैं। उन्होंने बताया कि अद्भुत बात यह है कि मरीज अपने अंत के बारे में किसी तरह की चेतावनी लेकर ही बोलते हैं। उनके शरीर में कोई भी ऐसा संकेत नहीं होता जो मौत के करीब होने का संकेत दे, फिर भी यह परिवर्तन होता है। यह आध्यात्मिक बदलाव है, जिसे वैज्ञानिक तौर पर समझाना मुश्किल है।”

किर्स्टी ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा, “इन अंतिम पलों को देखना आसान नहीं है। हम मरीजों और उनके परिवारों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाते हैं। समय के साथ आप स्वीकार करना सीख जाते हैं कि यह हमारे काम का हिस्सा है। जीवन आध्यात्मिक है और प्यार, कृतज्ञता और दूसरों के लिए अच्छा करने की भावना सबसे महत्वपूर्ण है।”

सहकर्मियों का समर्थन
किर्स्टी के इस खुलासे को कई स्वास्थ्यकर्मी भी सही मानते हैं। एक पूर्व हॉस्पिस नर्स ने कहा, “वे सही कहती हैं। मरीज हमेशा जानते हैं।” वहीं, अन्य ने सोशल मीडिया पर लिखा, “मेरे चाचा ने भी अपने अंतिम समय में ऐसा ही महसूस किया, जबकि उनकी हालत सामान्य थी।” 


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Content Editor

Anu Malhotra

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