ट्रंप का नया चौंकाने वाला बयानः अमेरिका-ईरान दोनों मिलकर वसूलेंगे होर्मुज़ में टोल ! रूबियो बोले- यह बेहद ‘खतरनाक’ प्लान
punjabkesari.in Thursday, Apr 09, 2026 - 12:57 PM (IST)
Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक चौंकाने वाला विवादित बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका, ईरान के साथ मिलकर Strait of Hormuz में जहाजों से टोल वसूली के लिए “जॉइंट वेंचर” बनाने पर विचार कर रहा है। यह बयान उस समय आया है जब हाल ही में दोनों देशों के बीच दो हफ्ते का युद्धविराम लागू हुआ है।ट्रंप ने कहा कि इस तरह का समझौता न सिर्फ समुद्री रास्ते को सुरक्षित करेगा, बल्कि इससे बड़ी कमाई भी हो सकती है। उन्होंने इसे “खूबसूरत चीज़” बताते हुए संकेत दिया कि अमेरिका इस रणनीतिक रास्ते पर आर्थिक और सुरक्षा दोनों फायदे चाहता है।
This morning, I asked President Trump if he’s okay with the Iranians charging a toll for all ships that go through the Strait of Hormuz, he told me there may be a Joint US-Iran venture to charge tolls:
— Jonathan Karl (@jonkarl) April 8, 2026
“We’re thinking of doing it as a joint venture. It’s a way of securing it —…
होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से करीब 20% वैश्विक तेल और गैस की सप्लाई गुजरती है। ऐसे में यहां टोल सिस्टम लागू करने का मतलब सीधे-सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर डालना है। हालांकि, यह “जॉइंट वेंचर” ईरान की पहले पेश की गई शांति योजना का हिस्सा नहीं था। इससे यह साफ है कि ट्रंप प्रशासन युद्धविराम के बाद नई रणनीति पर काम कर रहा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र में मौजूद रहकर ट्रैफिक और सुरक्षा दोनों को नियंत्रित कर सकता है।
इस प्रस्ताव पर अमेरिका के भीतर ही विरोध शुरू हो गया है। विदेश मंत्री Marco Rubio ने पहले ही ईरान के टोल सिस्टम को “गैरकानूनी और खतरनाक” बताया था। उनका कहना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय कानून और व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ेगा। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने इस पूरे युद्धविराम को “नाजुक” बताया है और चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने समझौते का उल्लंघन किया, तो स्थिति फिर बिगड़ सकती है।
बताया जा रहा है कि ईरान इस टोल सिस्टम से मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल अपने देश के पुनर्निर्माण में करेगा। कुछ हिस्सा ओमान को भी दिया जा सकता है। लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस व्यवस्था को मान्यता देगा या नहीं।कुल मिलाकर, ट्रंप का यह प्रस्ताव सिर्फ आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक भी है। इससे एक तरफ अमेरिका और ईरान के रिश्तों में नया मोड़ आ सकता है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है।
