कुत्ते के काटने के बाद लगवाया रेबीज का इंजेक्शन... फिर भी मौत ने नहीं छोड़ा पीछा, सीनियर बैंक अफसर ने खुद दे दी जान
punjabkesari.in Tuesday, Feb 24, 2026 - 12:39 PM (IST)
नेशनल डेस्क: मुंबई से सटे कल्याण के तिसगांव नाका इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक senior bank officer ने बीमारी के डर से मौत को गले लगा लिया। सहजीवन सोसायटी में रहने वाले एस विश्वनाथ अमीन एक प्रतिष्ठित बैंक में बड़े पद पर तैनात थे, लेकिन एक मामूली से दिखने वाले कुत्ते के काटने ने उन्हें मानसिक रूप से इस कदर तोड़ दिया कि उन्होंने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
हैरानी की बात यह है कि अमीन ने कुत्ते के काटने के बाद लापरवाही नहीं बरती थी और समय पर रेबीज का इंजेक्शन भी लगवा लिया था। इसके बावजूद उनके मन में यह डर बैठ गया था कि उनमें रेबीज के लक्षण पैदा हो रहे हैं। उन्हें लगातार यह चिंता सता रही थी कि अगर उन्हें यह लाइलाज बीमारी हुई, तो उनके परिवार का क्या होगा। इसी काल्पनिक डर और मानसिक तनाव के आगे हार मानकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया। इस घटना ने अब स्थानीय प्रशासन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद शिवसेना (शिंदे गुट) के पार्षद महेश गायकवाड़ ने नगर निगम के Additional Commissioner से मिलकर आवारा कुत्तों की समस्या पर लगाम लगाने की सख्त मांग की है।
क्या वाकई इतना जानलेवा है रेबीज?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें कोई दो राय नहीं कि रेबीज एक बेहद गंभीर बीमारी है जो सीधे इंसान के तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क पर प्रहार करती है. लेकिन यह समझना जरूरी है कि अगर सही समय पर 'Post-exposure prophylaxis' (PEP) यानी वैक्सीन का पूरा कोर्स ले लिया जाए, तो इससे शत-प्रतिशत बचा जा सकता है। अक्सर वायरस के शरीर में प्रवेश करने से लेकर लक्षण दिखने तक 1 से 3 महीने का वक्त लगता है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि बीमारी से ज्यादा खतरनाक वह मानसिक डर होता है जो इंसान को अंदर से खोखला कर देता है। ऐसे हालातों में पीड़ित को इलाज के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श और काउंसलिंग की भी सख्त जरूरत होती है ताकि वह भ्रम और हकीकत के बीच का अंतर समझ सके।
रेबीज के शुरूआती लक्षण
रेबीज की शुरुआत बहुत सामान्य लक्षणों से होती है, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. सबसे पहला संकेत उस जगह पर मिलता है जहां जानवर ने काटा हो- वहां लगातार खुजली, जलन या सुन्नपन महसूस होना इसका शुरुआती लक्षण है। इसके अलावा पीड़ित को हल्का बुखार, सिरदर्द, थकान और मांसपेशियों में खिंचाव महसूस हो सकता है। कुछ मामलों में भूख कम लगना और गले में खराश की शिकायत भी होती है। जागरूकता ही इस बीमारी का सबसे बड़ा कवच है, क्योंकि एक बार लक्षण पूरी तरह उभर आने के बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है।
