NCERT Controversy मामले में कांग्रेस ने PM मोदी पर साधा निशाना
punjabkesari.in Friday, Feb 27, 2026 - 01:10 PM (IST)
नेशनल डेस्क: कांग्रेस ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की एक पाठ्यपुस्तक से जुड़े विवाद के मामले में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने ''स्वयं पाठ्यपुस्तकों के पुनर्लेखन के लिए नागपुर सांप्रदायिक तंत्र का मार्गदर्शन किया है।'' पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय को इस बात की भी जांच करनी चाहिए कि पाठ्यपुस्तकों को फिर से कैसे लिखा गया है और ''वे कैसे ध्रुवीकरण और राजनीतिक हिसाब-किताब करने का साधन बन गई हैं।''
<
इजरायल में वास्तविक नैतिक कायरता दिखाने के बाद प्रधानमंत्री अब एनसीईआरटी की पुस्तकों के मुद्दे पर बनावटी आक्रोश जता रहे हैं। स्पष्ट रूप से एक डैमेज कंट्रोल प्रयास के तहत यह संदेश दिया जा रहा है कि वे एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका से जुड़े आलोचनात्मक उल्लेखों से बेहद…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) February 27, 2026
>
रमेश ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''इजराइल में वास्तविक नैतिक कायरता का प्रदर्शन करने के बाद, प्रधानमंत्री एनसीईआरटी पुस्तकों के मुद्दे पर नकली आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं। स्पष्ट रूप से नुकसान की भरपाई की कवायद के तहत वह बता रहे हैं कि वह एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों में न्यायपालिका के महत्वपूर्ण संदर्भों से बेहद नाखुश हैं।'' उन्होंने दावा किया कि पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री ने शिक्षा क्षेत्र के ऐसे ''झोलाछाप लोगों के एक नेटवर्क की अगुवाई की है, जिन्होंने पाठ्यपुस्तकों को अपने वैचारिक वायरस से संक्रमित करके गंभीर क्षति पहुंचाई है।'' उनका कहना है कि यह अचानक नहीं हुआ है, बल्कि एक व्यवस्थित अभियान का हिस्सा हैं।
रमेश ने दावा किया, ''प्रधानमंत्री मोदी ने स्वयं पाठ्यपुस्तकों के पुनर्लेखन के लिए नागपुर सांप्रदायिक तंत्र का मार्गदर्शन किया है। यह उनका खुद को उन पाठ्यपुस्तकों से दूर करने का सरासर पाखंड है, जिसने उच्चतम न्यायालय को चिंतित किया है।'' प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर अध्याय होने को लेकर बुधवार को कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद एनसीईआरटी ने विवादित पाठ्यपुस्तक को अपनी वेबसाइट से हटा दिया। न्यायालय ने बृहस्पतिवार को एनसीईआरटी की इन किताबों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया और किताबों की सभी प्रतियों को जब्त करने के साथ-साथ इसके डिजिटल संस्करणों को भी हटाने का आदेश दिया।
