पाक आक्रमण पर 22 अक्तूबर को मनाएं काला दिवस: जेकेयूएफ

2020-10-17T15:59:17.553


जम्मू : द जम्मू एवं कश्मीर यूनिटि फाऊंडेशन ने जम्मू कश्मीर के नागरिकों से आग्रह किया है कि 22 अक्तूबर को काला दिवस के तौर पर मनाएं जब 1947 में पाकिस्तान की सेना ने पूर्व के जम्मू कश्मीर रियासत पर हमला कर दिया और इस हमलमें लाखों हिंदुओं, सिखों और मुस्लिमानों ने अपनी शहाद दी जबकि इस आक्रमण को कबायली हमला बताया गया। 


द जम्मू एवं कश्मीर यूनिटि फाऊंडेशन के प्रधान अजात जम्वाल ने बताया कि 22 अक्तूबर 1947 के दिन पाकिस्तानी सेना ने छदम भेष में पूर्व की जम्मू कश्मीर रियासत पर हमला किया था। इस हमले को रोकने के लिए लाखों लोगों ने कुर्बानियां दी और फाऊंडेशन इसी को लेकर 22 अक्तूबर 2020 को ‘पाकिस्तानी सेना की घुसपैठ कबायली हमला नहीं’ विषय पर सातवां सेमीनार का आयोजन करने जा रही है। सेमीनार में वक्ता पाकिस्तान के इस पहले हमले पर लोगों पर की गई हिंसक नृशंसता बारे विस्तार से बताएं और मौजूदा समय में भारत सरकार के ऐतिहासिक निर्णय जिसमें अनुच्छेद 370 को हटा जम्मू कश्मीर का भारत के साथ पूर्ण विलय किया। 


जम्वाल ने कहा कि पाकिस्तान की कुचालों को कश्मीर वादी में कुचलने की जरूरत है जो कश्मीर में आतंकवाद, सिविल कफ्र्यू और स्वयं घर में कैद रहकर आम जीवन को बाधित करते हैं। पाक 1947, 1965, 1999 से एक ही नीति अपनाए हुए है और नान स्टेट एक्टर, आतंकवादियों को जम्मू कश्मीर में भेज आमजनता के जीवन को बाधित कर रहे हैं। उन्होंने कश्मीर के लोगों से सिविल कफ्र्यू का उल्लंघन करने का आग्रह किया और प्रशासन से कहा कि राष्ट्रविरोधी, शांति विरोधी तत्वों के मंसूबों को विफल बनाया जाए।  जम्वाल ने कहा कि पाकिस्तान ने ट्रायबल और सेना को जेहाद के नाम पर क्रियाशील किया और हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की सयुक्त राष्ट्र में भाषण 72 साल बाद भी माइंडसेट को उजागर कर दिया है। 


Monika Jamwal

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