Candida Auris: कोरोना के बाद बड़ा खतरा: इस बीमारी पर दवाएं हो रही बेअसर, अमेरिका के 28 राज्य अलर्ट: जानें भारत के लिए कितनी बड़ी चेतावनी
punjabkesari.in Tuesday, Jan 06, 2026 - 11:43 AM (IST)
नेशनल डेस्क: कोरोना महामारी अभी पूरी तरह पीछे नहीं गई थी कि अब स्वास्थ्य जगत में नई चुनौती सामने आ गई है। अमेरिका में Candida Auris नाम का सुपरबग तेजी से फैल रहा है और रिपोर्ट्स के अनुसार 28 राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है। चिंता की बात यह है कि इस खतरनाक फंगस पर कई दवाएं बेअसर साबित हो रही हैं, जिससे यह और ज्यादा घातक बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ अमेरिका का मामला नहीं, बल्कि भारत सहित अन्य देशों के लिए भी बड़ी चेतावनी है। यह कोई साधारण संक्रमण नहीं है, बल्कि एक ऐसा 'सुपरबग' है जिस पर अधिकांश एंटी-फंगल दवाइयां बेअसर साबित हो रही हैं।
क्या है यह जानलेवा फंगस और कहां से आया?
Candida auris एक विशेष प्रकार का खमीर (Yeast) है जो रक्तप्रवाह में घुसकर शरीर के आंतरिक अंगों को बुरी तरह प्रभावित करता है। इसकी पहचान सबसे पहले 2009 में जापान में एक रोगी के कान के जरिए हुई थी। देखते ही देखते यह वैश्विक खतरा बन गया। भारत में भी 2014 के आसपास इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चेतावनी माना गया था। वर्तमान में अकेले अमेरिका में इसके 7,000 से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जो मुख्य रूप से अस्पतालों और देखभाल केंद्रों में फैल रहे हैं।
यह इतना घातक क्यों माना जा रहा है?
इस 'सुपरबग' की सबसे डरावनी बात इसकी सहनशक्ति है।
अमर रहने की क्षमता: यह आम साफ-सफाई वाले रसायनों (Disinfectants) से नहीं मरता और मेडिकल उपकरणों या इंसान की त्वचा पर हफ्तों तक जीवित रह सकता है।
दवाओं का प्रतिरोध: इसके कई स्ट्रेन ऐसे विकसित हो चुके हैं जो दुनिया की सबसे शक्तिशाली एंटी-फंगल दवाओं को भी मात दे देते हैं।
कमजोरों पर वार: यह उन लोगों के लिए मौत का वारंट साबित हो सकता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कमजोर है या जो लंबे समय से अस्पताल में भर्ती हैं।
किन इलाकों में है सबसे ज्यादा खतरा?
अमेरिका के लगभग आधे हिस्से में इसका असर देखा जा रहा है। कैलिफोर्निया, टेक्सास, इलिनोइस, न्यूयॉर्क और फ्लोरिडा जैसे प्रमुख राज्यों के साथ-साथ ओरेगन, मिशिगन और जॉर्जिया सहित कुल 28 राज्यों में यह तेजी से फैल चुका है।
इन संकेतों को न करें नजरअंदाज
कैंडिडा ऑरिस के लक्षण स्पष्ट नहीं होते, जिससे इसकी पहचान मुश्किल हो जाती है। यदि शरीर में निम्नलिखित बदलाव दिखें, तो यह खतरे की घंटी हो सकती है:
तेज बुखार और कंपकंपी, जो सामान्य दवाओं से ठीक न हो।
अत्यधिक शारीरिक कमजोरी और सुस्ती महसूस होना।
रक्तचाप (Blood Pressure) का अचानक गिर जाना।
दिल की धड़कनों का असामान्य रूप से तेज होना।
कान के भीतर लगातार दर्द, भारीपन या दबाव का अहसास।
बचाव का रास्ता क्या है?
चूंकि यह संक्रमण अस्पतालों के वातावरण और संक्रमित सतहों के संपर्क में आने से फैलता है, इसलिए स्वच्छता ही एकमात्र ढाल है। गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों और बुजुर्गों के मामले में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। अगर अस्पताल में रहने के दौरान या बाद में संक्रमण के लक्षण दिखें, तो तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेना अनिवार्य है।
