8th Pay Commission: सरकारी कर्मचारियों के लिए नया नियम! अच्छा काम किया, तो बढ़ेगा वेतन –वरना जो था वही रहेगा
punjabkesari.in Saturday, Apr 05, 2025 - 10:17 AM (IST)

नेशनल डेस्क: सरकारी नौकरी करने वालों के लिए बड़ी खबर है। आने वाला 8वां वेतन आयोग (8th Pay Commission) अब सिर्फ वेतन और भत्तों की समीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह कर्मचारियों के प्रदर्शन आधारित वेतन (Performance Related Pay - PRP) पर भी फोकस करेगा। यानी अब सिर्फ सरकारी कर्मचारी होना ही काफी नहीं, बल्कि अच्छा काम भी करना होगा तभी वेतन में बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा। इस नई प्रणाली के जरिए ईमानदारी और मेहनत करने वाले कर्मचारियों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।
पहली बार परफॉर्मेंस बेस्ड पे नहीं, लेकिन अब होगा लागू
परफॉर्मेंस आधारित वेतन की अवधारणा कोई नई नहीं है। 4वें से लेकर 7वें वेतन आयोग तक इस पर लगातार सुझाव दिए गए, लेकिन कभी इसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया। अब 8वां वेतन आयोग इसे व्यावहारिक और पारदर्शी तरीके से लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इससे उन कर्मचारियों को लाभ मिलेगा जो अपने काम में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं, जबकि जो लापरवाह या औसत प्रदर्शन करते हैं उन्हें केवल सामान्य वेतन ही मिलेगा।
4वें से 7वें वेतन आयोग तक PRP की यात्रा
4वें वेतन आयोग ने सबसे पहले यह सुझाव दिया था कि बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को वेरिएबल इंक्रीमेंट यानी प्रदर्शन के आधार पर वेतनवृद्धि दी जाए। इसके बाद 5वें वेतन आयोग ने संकेत दिया कि सिविल सेवा में एक प्रदर्शन-आधारित वेतन घटक शामिल किया जाना चाहिए।
6वें वेतन आयोग ने इसे और विस्तार दिया और Performance Related Incentive Scheme (PRIS) का प्रस्ताव रखा। इसके तहत कर्मचारियों को व्यक्तिगत या टीम स्तर पर प्रदर्शन के आधार पर वार्षिक बोनस देने की बात कही गई थी। इसके बाद कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने एक मॉडल तैयार किया जिसमें टीम और व्यक्तिगत दोनों स्तर पर बोनस देने का सिस्टम प्रस्तावित किया गया।
7वें वेतन आयोग ने भी PRP को सभी कर्मचारियों के लिए लागू करने की सिफारिश की। लेकिन आयोग ने यह स्पष्ट किया कि इसके लिए पूरी नई प्रणाली लाने की बजाय, मौजूदा ढांचे में ही बदलाव कर इसे ज्यादा आसानी से लागू किया जा सकता है।
PRP लागू करने के आधार और तरीका
7वें वेतन आयोग ने PRP को लागू करने के लिए कुछ मुख्य आधार भी सुझाए। इसमें सबसे अहम था Annual Performance Appraisal Report (APAR) यानी वार्षिक मूल्यांकन रिपोर्ट, जिसके ज़रिए कर्मचारी के साल भर के काम का आकलन किया जाता है। इसके साथ Results Framework Document (RFD), काम की गुणवत्ता और Performance Output Metrics जैसे मापदंड भी शामिल किए गए।
आयोग का मानना था कि इन मौजूदा सिस्टम्स में ही थोड़ा बदलाव कर PRP को आसानी से लागू किया जा सकता है। इससे पूरी प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और व्यवहारिक हो जाएगी।
बोनस योजनाओं का होगा विलय
वेतन आयोग ने यह भी सुझाव दिया कि अगर PRP को पूरी तरह लागू किया जाता है, तो मौजूदा बोनस योजनाओं को विलय (subsume) कर देना चाहिए। यानी अलग से बोनस देने की परंपरा खत्म कर दी जाए और उसकी जगह PRP को ही एकमात्र मानदंड बनाया जाए। हालांकि, जब तक सभी विभागों में PRP लागू नहीं होता, तब तक मौजूदा बोनस योजनाओं को उत्पादकता और लाभ से जोड़कर जारी रखा जाना चाहिए।
सरकारी नौकरी में बदलाव की शुरुआत
इस नई व्यवस्था के लागू होने से सरकारी तंत्र में काम की गुणवत्ता और जवाबदेही बढ़ेगी। अब सिर्फ नौकरी पाने के बाद आराम करना संभव नहीं होगा। जो कर्मचारी सही मायनों में मेहनत करेंगे, उन्हें उनका सही इनाम मिलेगा, और बाकी लोगों को अपने प्रदर्शन में सुधार करने की ज़रूरत पड़ेगी।