US का ईरान पर बड़ा अटैकः बंदर अब्बास पर मिसाइल साइट्स बनी निशाना, होर्मुज के पास माइंस बिछा रहीं नावें की तबाह
punjabkesari.in Tuesday, May 26, 2026 - 12:28 PM (IST)
International Desk: अमेरिका ने दक्षिणी ईरान में नए सैन्य हमले किए हैं। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि यह कार्रवाई “आत्मरक्षा” में की गई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (USCC) के अनुसार हमलों में ईरानी मिसाइल लॉन्च साइट्स और उन नौकाओं को निशाना बनाया गया जो कथित तौर पर समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश कर रही थीं। हमले बंदर अब्बास के आसपास किए गए। यह दक्षिणी ईरान का बेहद रणनीतिक बंदरगाह शहर है। यहां ईरान का बड़ा नौसैनिक अड्डा मौजूद है। एयर बेस स्थित है औरहोर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद करीब है। दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी सैन्य गतिविधि का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। ईरानी मीडिया के मुताबिक बंदर अब्बास में तीन धमाकों की आवाज सुनी गई। Islamic Revolutionary Guard Corps ने कहा कि बंदर अब्बास एयरपोर्ट के पास विस्फोट की आवाज सुनाई दी, जिसके बाद एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिया गया। ईरानी एजेंसियों के मुताबिक फारस की खाड़ी के सिरिक और जास्क इलाकों में भी धमाकों जैसी आवाजें सुनी गईं।
🇺🇸🇮🇷 The U.S. just struck Iranian missile sites and naval assets near Bandar Abbas while Trump says negotiations are “proceeding nicely.”
— Mario Nawfal (@MarioNawfal) May 26, 2026
Washington calls the strikes defensive, not a ceasefire breach.pic.twitter.com/oemPjilA7u https://t.co/O2wfjpzUAK
अमेरिका ने क्या कहा?
'यूएस सेंट्रल कमांड' (CENTCOM) प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिंस (Tim Hawkins) ने कहा अमेरिका की सेना ने दक्षिणी ईरान में ''आत्मरक्षा'' के लिए मिसाइल प्रक्षेपण स्थलों और बारूदी सुरंगें बिछाने वाली नौकाओं पर हमले हमले किए । वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते को लेकर जारी वार्ता के संबंध में सोशल मीडिया पर कहा कि बातचीत ''अच्छी दिशा में आगे बढ़ रही है''। कैप्टन टिम हॉकिंस ने सोमवार को एक बयान में कहा कि ये हमले ''ईरानी बलों द्वारा उत्पन्न खतरों से हमारे सैनिकों की रक्षा के लिए'' आत्मरक्षा में किए गए थे लेकिन सेना ''जारी युद्धविराम के दौरान संयम बरत रही है''।
अब्राहम समझौते की शर्त
इससे पहले, ट्रंप ने कहा था कि ईरान युद्ध को समाप्त करने वाले किसी भी समझौते में यह शर्त शामिल होनी चाहिए कि सऊदी अरब और पाकिस्तान सहित कई अन्य देश अब्राहम समझौते में शामिल हों। अब्राहम समझौते अमेरिका की मध्यस्थता से ट्रंप के पहले कार्यकाल में हुए थे, जिनका उद्देश्य इजराइल के साथ संबंधों को सामान्य बनाना था। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब ईरान के साथ संभावित् समझौते को ट्रंप के उन साथी रिपब्लिकन सांसदों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है जो ईरान के प्रति कठोर रुख अपनाने के पक्षधर हैं और इससे वार्ता में नयी राजनयिक जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। उन्होंने लिखा, ''अमेरिका की ओर से इस बेहद जटिल पहेली को सुलझाने के लिए किए गए सभी प्रयासों के बाद, इन सभी देशों के लिए यह अनिवार्य होना चाहिए कि वे अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करें।''
ट्रंप की ‘यूरेनियम चेतावनी’
हमलों के बाद ट्रंप ने ईरान के यूरेनियम कार्यक्रम को लेकर सख्त बयान दिया। हालांकि पूरी चेतावनी का आधिकारिक विवरण सामने नहीं आया है, लेकिन अमेरिकी पक्ष लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताता रहा है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन बढ़ाकर परमाणु क्षमता मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान इन आरोपों से इनकार करता है। ताजा अमेरिकी हमलों पर तेहरान की ओर से अभी कोई आधिकारिक सैन्य जवाब सामने नहीं आया है।हालांकि ईरानी मीडिया और कट्टरपंथी नेताओं की प्रतिक्रियाओं से संकेत मिल रहे हैं कि देश के भीतर गुस्सा बढ़ रहा है।रिपोर्ट्स के मुताबिक Mohammad Bagher Zolghadr समेत कई कट्टरपंथी नेता अमेरिका के खिलाफ सख्त रुख की मांग कर रहे हैं।
