ईरान ने ठुकराया ट्रंप का प्रस्ताव; होर्मुज में फिर किया जहाज पर हमला, IRGC ने धधकते तेल टैंकर की फोटो की शेयर
punjabkesari.in Monday, Aug 03, 2026 - 02:22 PM (IST)
International Desk: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ओमान के खसाब (Khasab) के पास स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य में एक नागरिक तेल टैंकर के निकट प्रोजेक्टाइल गिरने की घटना सामने आई है। हालांकि, ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने स्पष्ट किया है कि जहाज और उसका पूरा चालक दल सुरक्षित है तथा किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है। घटना के बाद सुरक्षा निगरानी प्लेटफॉर्म Conflict Radar ने दावा किया कि यह कथित तौर पर ईरान की ओर से किया गया हमला था, जो असफल रहा। वहीं, कुछ रक्षा मामलों से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट्स ने भी इसी तरह के दावे किए हैं।
🚨IRAN’S STATE-RUN ISLAMIC REPUBLIC NEWS AGENCY PUBLISHES PHOTO OF OIL TANKER BURNING IN STRAIT OF HORMUZ AFTER IRGC ATTACK OVERNIGHT⚠️
💥ATTACK COMES AFTER TRUMP CALLED OFF US ATTACK ON IRAN, CLAIMING THAT IRAN HAD AGREED TO A CEASEFIRE DEAL INCLUDING FULLY REOPENING HORMUZ‼️… pic.twitter.com/rhy2MklPeA
— SilverTrade (@silvertrade) August 3, 2026
इसी बीच ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने होर्मुज में जलते हुए एक तेल टैंकर की तस्वीर जारी की। लेकिन कई ओपन-सोर्स विश्लेषकों ने दावा किया कि यह तस्वीर पहले तुर्की के एक स्रोत द्वारा जारी की गई फोटो से मेल खाती है। इस वजह से तस्वीर की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठ रहे हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान के साथ संभावित समझौते की रूपरेखा बनने के बाद अमेरिका ने नए सैन्य हमले फिलहाल रोक दिए हैं। ट्रंप ने यह भी कहा था कि प्रस्तावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों का समाधान शामिल है।
दूसरी ओर, कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्टों में दावा किया गया है कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने अमेरिकी प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। हालांकि इस संबंध में भी ईरान या अमेरिका की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है। यहां किसी भी प्रकार की सैन्य घटना का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
