UN समिति की दुनिया को चेतावनी- कोरोना की आड़ में जैव आतंकवाद फैला सकते हैं आंतकी समूह

punjabkesari.in Saturday, Dec 04, 2021 - 06:01 PM (IST)

जिनेवा: संयुक्त राष्ट्र समिति ने अपनी एक रिपोर्ट में जैव आतंकवाद को लेकर पूरी दुनिया को अलर्ट रहने का आह्वान किया है। संयुक्त राष्ट्र निकाय, नाटो संसदीय सभा और इंटरपोल, जिन्हें जैव आतंकवाद में शामिल समूहों और देशों की पहचान करने का काम सौंपा गया है ने एक मीडिया रिपोर्ट में  चेतावनी दी है कि कोरोना महामारी की आड़ में आतंकवादी समूह जैव रासायनिक हथियारों का उपयोग करके बड़े पैमाने पर आतंक फैला सकते हैं।

 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की यह समिति एक विशिष्ट निकाय है जो वैश्विक आतंकवाद के इस पहलू की निगरानी करती है। जिनेवा डेली की रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षा परिषद ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के तहत  स्वीकार किया कि परमाणु, रासायनिक और जैविक हथियारों का प्रसार और उनके वितरण के साधन अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा हैं।

 

सिंगापुर स्थित प्रकाशन के अनुसार  समिति ने इस साल मार्च में एक चेतावनी दी थी। तब इसके अध्यक्ष जुआन रेमन डे ला फुएंते रामिरेज़ ने संयुक्त राष्ट्र के संबोधन में कहा था कि, “भले ही वैश्विक महामारी ने दुनिया को काफी बदल दिया है, लेकिन इसके खतरे को कम करके नहीं आंका जा सकता । अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के पास इसे होने से रोकने के लिए बहुपक्षीय उपकरण हैं जिनका उपयोग उनकी पूरी क्षमता के लिए किया जाना चाहिए।

 

रामिरेज़ ने कहा था कि हालांकि समिति के पास खतरे का आकलन करने का अधिकार नहीं है, लेकिन हम निश्चित रूप से जानते हैं कि आतंकवादी लंबे समय से जैविक हथियारों में रुचि रखते हैं । पिछले कुछ वर्षों में अल-कायदा द्वारा जैविक एजेंटों को हासिल करने और हथियार बनाने के प्रयासों के कई सबूत भी मिले हैं। समिति के पास इस धारणा को मानने का एक कारण यह भी है कि हाल ही में अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी में जैविक हथियार बनाने के कई मामले सामने आए हैं । जिनेवा डेली के अनुसार  समिति ने दुनिया को सभी देशों को जैव रासायनिक हथियारों के शोषण को रोकने के लिए उचित उपाय करने की सिफारिश की।

 
क्या है जैव आतंकवाद ?

  • जैव आतंकवाद एक प्रकार की उद्देश्यपूर्ण हिंसक आतंकवादी कार्य है जिसमें जैविक हथियारों का प्रयोग किया जाता है।
  • इसमें प्रायः विषाणुओं, जीवाणुओं जैसे जैविकीय माध्यमों का प्रयोग किया जाता है, जो मानव अथवा पौधों के कोशिकाओं के पहुंचकर उसे हानि पहुंचते हैं। इससे संक्रमित व्यक्ति (या पौधे) को अपंगता या मृत्यु तक हो सकती है।
  • इसका प्रयोग आतंकवादियों के साथ साथ तकनीकी संपन्न राष्ट्र भी कर रहे हैं।
  • आधुनिक काल में जैव आतंकवाद ऐसी गतिविधि जिसके अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विषाणुओं, जीवाणुओं को मानव द्वारा ही प्राकृतिक अथवा परिवर्द्धित रूप में विकसित कर अपने लक्ष्य संधान हेतु किसी राष्ट्र के विरुद्ध निर्दोष जनता, पशुओं अथवा पौधों को गंभीर हानि पहुंचाने के लिए योजनाबद्ध रूप से प्रयुक्त प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जाता है।
  • जैव आतंकवाद के लिये प्रयोग होने वाले पदार्थों की  श्रेणी में ऐसे पदार्थ आते हैं जो जिनका एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने का संक्रमण दर अत्यधिक होता है ।
  • इसमें मृत्यु दर भी अधिक होती है। भारी संख्या में जनहानि होती है।
  • अत: इनसे निपटने हेतु विशिष्ट स्वास्थ्य जागरूकता के साथ तैयारी की ज़रूरत पड़ती है।
  • इस श्रेणी के कारको से होने वाली कुछ बीमारी एंथ्रेक्स, प्लेग इत्यादि हैं।

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Content Writer

Tanuja

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