ईरान की मिसाइलों से हिला अमेरिका; सबसे बड़े हमले से पीछे हटे ट्रम्प, सेना को कार्रवाई रोकने का आदेश
punjabkesari.in Sunday, Jul 26, 2026 - 12:51 PM (IST)
International Desk: ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिका की एयर डिफेंस क्षमता को लेकर नई चिंताएं सामने आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने में बड़ी संख्या में इंटरसेप्टर मिसाइलों के इस्तेमाल से अमेरिकी भंडार तेजी से घट रहा है। इसी वजह से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलहाल ईरान के साथ सीधे टकराव को और बढ़ाने से बचने का संकेत दिया है।अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस में हाल के दिनों में कई उच्चस्तरीय बैठकों में इंटरसेप्टर मिसाइलों के घटते स्टॉक पर चर्चा हुई। चिंता तब और बढ़ गई जब जॉर्डन में एक ईरानी मिसाइल अमेरिकी एयर डिफेंस को भेदते हुए तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत का कारण बनी।बताया जा रहा है कि लगातार दो सप्ताह तक ईरान के खिलाफ की गई भारी बमबारी और उसके जवाब में हुए मिसाइल हमलों ने अमेरिकी रक्षा संसाधनों पर दबाव बढ़ा दिया है।
ट्रंप ने क्यों बदली रणनीति?
रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आशंका जताई कि यदि ईरान के साथ पूर्ण युद्ध शुरू होता है तो अमेरिका के इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार तेजी से खत्म हो सकता है। इससे खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैन्य अड्डों की सुरक्षा कमजोर पड़ सकती है। इसी कारण ट्रंप प्रशासन फिलहाल तनाव कम करने और कूटनीतिक विकल्पों पर अधिक जोर देता दिखाई दे रहा है।
जनरल ने दी चेतावनी
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी जनरल डैन केन ने व्हाइट हाउस को बताया कि ईरान के साथ पूर्ण युद्ध संभव है, लेकिन इससे मध्य पूर्व में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के पास मौजूद एयर डिफेंस मिसाइलों का भंडार काफी कम हो जाएगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ईरान के पास अभी भी बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन मौजूद हैं, जिससे लंबा संघर्ष अमेरिका के लिए महंगा साबित हो सकता है।व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीवन चेउंग ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य या अमेरिकी सहयोगियों के खिलाफ आक्रामक गतिविधियां जारी रखीं तो सभी विकल्प खुले रहेंगे।
ट्रंप का रुख
राष्ट्रपति ट्रंप ने हालिया बयानों में कहा है कि उनकी प्राथमिकता बातचीत के जरिए समाधान निकालना है। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल रहते हैं तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई सहित सभी विकल्पों पर विचार करेगा। फिलहाल ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की बजाय उसके नेतृत्व को और अधिक एकजुट कर सकती है। उनका कहना है कि बाहरी खतरे की स्थिति में ईरान का नेतृत्व अंदरूनी मतभेद भुलाकर सैन्य जवाब पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकता है।
