रूस का सनातन की ओर बढ़ा झुकावः रशियन दंपत्ति ने गंगा तट पर रचाया वैदिक विवाह, सिंदूर दान में छलकीं आंखें (Video)
punjabkesari.in Thursday, Jan 22, 2026 - 03:04 PM (IST)
International Desk: रूस आज केवल वैश्विक राजनीति और युद्ध की खबरों तक सीमित नहीं है। मॉस्को, सेंट पीटर्सबर्ग और साइबेरिया जैसे इलाकों में अब योग कक्षाएं, ध्यान शिविर और भगवद्गीता चर्चा समूह दिखाई देने लगे हैं। यह बदलाव बताता है कि रूसी समाज भीतर से किसी गहरे सुकून की तलाश में है और सनातन धर्म की ओर बढ़ रहा है। इसी की एक अन्य मिसाल उत्तर प्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी काशी में देखने को मिली जहां बुधवार को सनातन संस्कृति की दिव्यता का एक अद्भुत दृश्य देखने को मिला। रूस से आए एक दंपत्ति ने हिंदू धर्म और सनातन परंपराओं से प्रभावित होकर गंगा तट पर वैदिक विधि से विवाह रचाया। बाबा श्री काशी विश्वनाथ को साक्षी मानकर दंपत्ति ने सात फेरे लिए और सात जन्मों तक साथ निभाने का संकल्प लिया।
Love knows no borders, and in Kashi, it finds a soul! Witness the beautiful union of an international couple who chose the sacred Ganga Ghats in Varanasi to start their forever. Dressed in traditional attire and following ancient Hindu rituals, their wedding is a testament to… pic.twitter.com/NZWokPVRe5
— NewsX World (@NewsX) January 22, 2026
दशाश्वमेध घाट स्थित मंदिर परिसर में काशी के विद्वान ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह संपन्न कराया गया। हवन कुंड के चारों ओर फेरे लेते समय दूल्हा-कन्या भावुक नजर आए। घाट पर मौजूद महिलाओं ने मंगल गीत गाकर विवाह को और भी पावन बना दिया।हिंदू विवाह की सबसे महत्वपूर्ण रस्म सिंदूर दान के दौरान दुल्हन मरीन की आंखें नम हो गईं। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद श्रद्धालु और पर्यटक भी भाव-विभोर हो उठे। रूस से आए कॉन्स्टेंट और मरीन ने बताया कि वे पेशे से व्यापारी हैं और 11 वर्ष पहले रशियन परंपरा के अनुसार विवाह कर चुके हैं। भारत भ्रमण के दौरान काशी पहुंचने पर उन्हें सनातन धर्म, भगवान महादेव और यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा ने गहराई से प्रभावित किया।

दंपत्ति ने बताया कि काशी में रहते हुए उन्होंने सनातन धर्म की मान्यताओं, संस्कारों और जीवन दर्शन को करीब से जाना, जिसके बाद उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज से दोबारा विवाह करने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने काशी के ब्राह्मण शिवाकांत पांडे से संपर्क कर वैदिक विधि से विवाह कराया। दुल्हन मरीन ने बताया कि रूस में मौजूद उनके परिजन इस विवाह को लेकर बेहद उत्साहित थे। विवाह की सभी रस्में ऑनलाइन माध्यम से उन्हें दिखाई गईं। परिजनों ने इस निर्णय पर सहमति जताई और आशीर्वाद दिया।मरीन ने कहा कि हिंदू रीति-रिवाज से विवाह करना उनके जीवन का सबसे आध्यात्मिक और अविस्मरणीय अनुभव है।
रूस और सनातन: शांति की ओर बढ़ता समाज
लगातार संघर्ष, प्रतिबंध और अनिश्चित भविष्य ने रूसी समाज को मानसिक रूप से थका दिया है। ऐसे में सनातन धर्म का कर्म सिद्धांत, आत्मा की अमरता और मोह से मुक्ति का संदेश उन्हें गहराई से छू रहा है।रूस के बड़े शहरों में योग केंद्र तेजी से बढ़े हैं। भारतीय गुरुओं द्वारा सिखाया गया प्राणायाम और ध्यान रूसी युवाओं के लिए मानसिक शांति का साधन बन गया है।
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Video Source: ANI pic.twitter.com/5SO70TEjYI
गीता का गहरा संदेश और योग
रूसी भाषा में भगवद्गीता के अनुवाद तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। “अपने कर्तव्य का पालन करो, परिणाम ईश्वर पर छोड़ दो”—यह विचार युद्ध और असमंजस से घिरे समाज को स्थिरता देता है।रूस में योग अब केवल व्यायाम नहीं रहा। यह तनाव, अवसाद और अकेलेपन से लड़ने का साधन बन गया है। युवा हों या बुज़ुर्ग, बड़ी संख्या में लोग ध्यान और प्राणायाम को अपना रहे हैं।
इस्कॉन की भूमिका
इस्कॉन जैसे संगठनों ने रूस में सनातन को जीवन पद्धति के रूप में प्रस्तुत किया। कीर्तन, प्रसाद और भारतीय पर्व अब कई रूसी परिवारों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। रूसी नागरिक साफ कहते हैं कि वे किसी धर्म को नहीं, बल्कि शांति और संतुलन को अपनाना चाहते हैं। सनातन उन्हें संघर्ष के बीच भी स्थिर रहने की शक्ति देता है।
