पूर्व PM केपी ओली ने सुशीला कार्की सरकार पर लगाया बड़ा आरोप, सता रहा गिरफ्तारी का डर
punjabkesari.in Monday, Oct 20, 2025 - 05:02 AM (IST)
इंटरनेशनल डेस्क: नेपाल की सियासत एक बार फिर उथल-पुथल में है। रविवार (19 अक्टूबर 2025) को पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने मौजूदा सुशीला कार्की सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार बिना किसी ठोस कारण के उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि 5 मार्च 2026 को प्रस्तावित आम चुनाव कराने को लेकर वर्तमान सरकार गंभीर नहीं है।
भंग प्रतिनिधि सभा की बहाली की मांग करेंगे ओली
पद से हटने के बाद काठमांडू में मीडिया से बातचीत में ओली ने कहा कि उनकी पार्टी सीपीएन-यूएमएल भंग की गई प्रतिनिधि सभा की बहाली की मांग करेगी। उन्होंने बताया कि सितंबर की शुरुआत में Gen-Z समूह द्वारा भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्रतिबंध को लेकर किए गए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया था। इसके बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को 12 सितंबर को अंतरिम प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया और राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उनकी सिफारिश पर संसद भंग कर दी थी।
“मेरा फोन जब्त कर लिया गया”- ओली का खुलासा
केपी ओली ने खुलासा किया कि प्रदर्शनकारियों के हमले के बाद जब नेपाली सेना ने उन्हें प्रधानमंत्री आवास से सुरक्षित निकाला, तो कुछ दिनों तक उनका मोबाइल फोन जब्त रखा गया था। उन्होंने कहा कि सरकार ने उनके कुछ सुरक्षाकर्मियों को वापस बुलाकर उनकी सुरक्षा से खिलवाड़ किया है। ओली के अनुसार, सरकार स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए आवश्यक सुरक्षा माहौल बनाने में विफल रही है।
“हिंसा के पीछे बाहरी तत्व”- ओली का आरोप
ओली ने कहा कि उनके कार्यकाल में देश की कानून-व्यवस्था मजबूत थी और मीडिया की स्वतंत्रता सुरक्षित थी। उन्होंने मीडिया पर आरोप लगाया कि उसने Gen-Z आंदोलन के दौरान हुई तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं को नजरअंदाज किया। उनका कहना है कि इन विरोध प्रदर्शनों में हिंसा बाहरी तत्वों की घुसपैठ के कारण हुई।
“नेपो-बेब अभियान से फैला डर”- ओली की टिप्पणी
नेपाल के युवाओं द्वारा शुरू किए गए ‘नेपो-किड्स’ और ‘नेपो-बेब’ अभियानों पर बोलते हुए ओली ने कहा, “मैं Gen-Z के इस आंदोलन को स्वीकार नहीं कर सकता, जिसने नेपाली जनता के बीच भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।” नेपाल की राजनीति में यह घटनाक्रम नए सियासी समीकरणों की आहट दे रहा है- क्या ओली की वापसी की पटकथा फिर से लिखी जा रही है?
