कंबोडिया में अब हर नौजवान के लिए सेना में भर्ती होना अनिवार्य: भर्ती से भागे तो होगी 5 साल तक की जेल

punjabkesari.in Tuesday, May 26, 2026 - 05:21 AM (IST)

इंटरनेशनल डेस्कः कंबोडिया की सरकार ने देश की सुरक्षा और युवाओं में देशभक्ति का जज्बा भरने के लिए एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री हुन मानेट ने सोमवार को घोषणा की कि देश का नया अनिवार्य सैन्य भर्ती कानून (Conscription Law) लागू हो गया है। इस कानून के तहत सेना में सेवा देने से बचने या भागने वालों को अब 5 साल तक की जेल की हवा खानी पड़ सकती है।

किंग की अनुपस्थिति में सीनेट अध्यक्ष ने किए हस्ताक्षर
इस कानून पर शनिवार को सीनेट अध्यक्ष हुन सेन ने कार्यवाहक राष्ट्राध्यक्ष के रूप में हस्ताक्षर किए। गौरतलब है कि कंबोडिया के राजा नोरोडोम सिहामोनी वर्तमान में प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए चीन में हैं। यह नया कानून साल 2006 के पुराने कानून की जगह लेगा, जिसे कभी लागू नहीं किया गया था और अब इसे पुराना माना जा रहा था।

18 से 25 साल के पुरुषों के लिए 2 साल की सेवा जरूरी
नए कानून के मुताबिक, 18 से 25 वर्ष की आयु के सभी कंबोडियाई पुरुषों के लिए सेना में दो साल तक सेवा देना अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं, महिलाओं के लिए यह सेवा पूरी तरह स्वैच्छिक रखी गई है। जिन युवाओं को सेवा के लिए बुलाया जाएगा, उन्हें नोटिस मिलने के 30 दिनों के भीतर हाजिर होना होगा, वरना उन्हें भगोड़ा माना जाएगा।

शांति और युद्ध के समय के लिए अलग-अलग सजा
सरकार ने सेना भर्ती से बचने वालों के लिए सख्त दंड का प्रावधान किया है:

  • शांति काल में: यदि कोई शांति के समय भर्ती से बचता है, तो उसे 6 महीने से 2 साल तक की जेल और 250 से 1,000 डॉलर तक का जुर्माना देना होगा।
  • युद्ध काल में: यदि देश युद्ध या विदेशी हमले का सामना कर रहा है, तो सजा बढ़कर 2 से 5 साल की जेल और जुर्माना 2,500 डॉलर तक हो सकता है।

थाईलैंड के साथ सीमा विवाद के बाद बढ़ा तनाव
इस कानून को लाने के पीछे पिछले साल थाईलैंड के साथ हुई सीमा पर भीषण झड़पें मानी जा रही हैं। उस संघर्ष में लगभग 100 लोगों की मौत हुई थी और लाखों लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा था। अपनी सैन्य ताकत को मजबूत करने के लिए ही यह अनिवार्य भर्ती शुरू की गई है।

इन्हें मिलेगी छूट, 45 की उम्र तक रहेंगे रिजर्व फोर्स का हिस्सा
कानून में कुछ श्रेणियों को छूट भी दी गई है, जिनमें भिक्षु (Monks), पादरी, दिव्यांग व्यक्ति और विज्ञान व तकनीक क्षेत्र में विशेष कौशल रखने वाले लोग शामिल हैं। अनिवार्य सेवा पूरी करने के बाद भी व्यक्ति 45 वर्ष की आयु तक रिजर्व फोर्स का हिस्सा बने रहेंगे। प्रधानमंत्री हुन मानेट ने कहा कि यह कानून युवाओं में राष्ट्रप्रेम विकसित करने और देश की रक्षा के लिए तैयार रहने की नींव रखेगा।


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Content Writer

Pardeep

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