सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौते से भड़का ईरान; बोला- यमन में हस्तक्षेप बंद करो, वर्ना भुगतने पड़ेंगे गंभीर परिणाम

punjabkesari.in Sunday, Oct 11, 2026 - 04:52 PM (IST)

Tehran: सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के बीच रक्षा समझौते को लेकर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान ने इस त्रिपक्षीय समझौते की आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि यमन में हस्तक्षेप के क्षेत्रीय सुरक्षा पर अवांछित परिणाम हो सकते हैं। तेहरान ने खास तौर पर पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब की आधारभूत संरचनाओं पर हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों में तेजी के बाद यह समझौता पांच अक्टूबर को परिचालन चरण में पहुंचा। पाकिस्तान और तुर्किये ने सऊदी अरब की सहायता के लिए कदम उठाना शुरू करने की बात कही है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई से जब उन खबरों के बारे में पूछा गया कि हजारों पाकिस्तानी सैनिकों को सऊदी अरब में तैनात किया जा सकता है, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने भी ऐसी अटकलें सुनी हैं और उम्मीद करते हैं कि ये सही न हों।

 

बघाई ने कहा कि क्षेत्र के देश जानते हैं कि यमन के मामले में किसी भी तरह का हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र के लिए अवांछित परिणाम पैदा कर सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मक्का समझौते जैसे रक्षा गठबंधनों का इस्तेमाल मुस्लिम समुदाय के हितों और कल्याण के खिलाफ नहीं किया जाएगा। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में पाकिस्तानी सैनिकों की बड़े पैमाने पर तैनाती की पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल यह मामला संभावित तैनाती से जुड़ी खबरों और ईरान की प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने समझौते का सीधे नाम लिए बिना पड़ोसी देशों से आत्मनिर्भरता और सच्चे भाईचारे पर आधारित नीति अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के समझौते ईरान की नीतियों को सीमित नहीं कर सकते। ईरान के कुछ सांसदों ने भी रक्षा समझौते की उपयोगिता पर सवाल उठाए हैं। संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के सदस्य अहमद बख्शायेश ने इसे केवल कागजी और राजनीतिक समझौता बताया।


इसी समिति के एक अन्य सदस्य इब्राहिम रेजाई ने सवाल किया कि क्या पाकिस्तान और तुर्किये के साथ समझौता वास्तव में सऊदी अरब की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि केवल कागजी समझौता सऊदी अरब को सुरक्षा नहीं दे सकता और उसे अपनी नीतियों में सुधार करना चाहिए। ईरान की आलोचना का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान की भूमिका पर केंद्रित है। इसकी वजह यह है कि इस्लामाबाद ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिशों में अहम भूमिका निभाता रहा है। ईरानी सांसद अहमद नादेरी ने पाकिस्तान की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पाकिस्तान यमन के लोगों के खिलाफ युद्ध में सऊदी अरब के साथ खड़ा होता है, तो उसे अब मध्यस्थ के बजाय क्षेत्रीय संघर्ष में शामिल पक्षकार के रूप में देखा जाना चाहिए।

 

ईरानी सरकारी मीडिया ने भी रक्षा समझौते के परिचालन चरण में पहुंचने पर आलोचनात्मक रिपोर्टें प्रकाशित की हैं। इनमें हूती अधिकारियों की उन चेतावनियों को भी प्रमुखता दी गई है, जो तुर्किये और पाकिस्तान को लेकर दी गई थीं। ईरान की समाचार एजेंसी तस्नीम ने इस घटनाक्रम को तुर्किये और पाकिस्तान के सऊदी अरब के साथ यमन के खिलाफ युद्ध में शामिल होने के रूप में पेश किया। वहीं, ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के निकट माने जाने वाले समाचार माध्यम नूर न्यूज ने सवाल उठाया कि यह मक्का  गठबंधन है या यमन के पीड़ित लोगों के खिलाफ गठबंधन।इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की कोशिश को ईरान संदेह की नजर से देख रहा है। हालांकि, रक्षा समझौते के परिचालन चरण में पहुंचने और पाकिस्तान की ओर से सऊदी अरब को सहायता देने के कदमों का अर्थ अपने आप में यह नहीं है कि पाकिस्तान यमन में सीधे सैन्य कार्रवाई शुरू कर चुका है।
 


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Content Writer

Tanuja

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