पाकिस्तान को झटका: ब्रिटिश संसद में गूंजा जम्मू-कश्मीर का मुद्दा, सांसद बोले-यह भारत का हिस्सा

punjabkesari.in Saturday, Oct 24, 2026 - 11:39 AM (IST)

London: जम्मू-कश्मीर पर भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन में ब्रिटिश संसद में एक अहम प्रस्ताव पेश किया गया है। कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद बॉब ब्लैकमैन ने यह प्रस्ताव जम्मू-कश्मीर विलय दिवस के अवसर पर रखा है। प्रस्ताव में 26 अक्टूबर, 1947 को महाराजा हरि सिंह द्वारा किए गए विलय पत्र का उल्लेख करते हुए भारत की संप्रभुता की पुष्टि की गई है। इसमें जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं, नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की मौत तथा कश्मीरी पंडितों की लक्षित हत्याओं पर भी चिंता जताई गई है। इस प्रस्ताव पर विभिन्न राजनीतिक दलों के तीन अन्य सांसदों ने भी हस्ताक्षर किए हैं। यह प्रस्ताव संसद में किसी विशेष मुद्दे की ओर सदस्यों का ध्यान आकर्षित करने के लिए इस्तेमाल होने वाली प्रक्रिया के तहत पेश किया गया है, जिसे अर्ली डे मोशन कहा जाता है।

 

1947 के विलय पत्र का किया उल्लेख
प्रस्ताव में कहा गया है कि ब्रिटेन में जम्मू-कश्मीर मूल के लोग 26 अक्टूबर को विलय दिवस मनाते हैं। इसमें उल्लेख किया गया है कि 26 अक्टूबर, 1947 को जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन महाराजा हरि सिंह ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।  प्रस्ताव में कहा गया है कि ब्रिटिश संसद भारत गणराज्य की जम्मू-कश्मीर पर संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की पुष्टि करती है। साथ ही, भारत और ब्रिटेन के बीच मजबूत तथा रचनात्मक द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को भी रेखांकित किया गया है।गौरतलब है कि अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा समाप्त कर उसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। इसी पुनर्गठन के दौरान लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया।

 

पाकिस्तान के आतंकवाद का भी जिक्र
प्रस्ताव में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी घटनाओं के दौरान मारे गए और घायल हुए सभी नागरिकों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई है। इसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में प्रभावित लोगों का भी उल्लेख किया गया है। प्रस्ताव में आतंकवादी घटनाओं के लगातार पड़ रहे प्रभाव पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि इन घटनाओं में नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों को जान गंवानी पड़ी है।  प्रस्ताव में कश्मीरी पंडितों की लगातार हो रही लक्षित हत्याओं पर दुख जताया गया है। इसमें कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में कश्मीरी पंडित अब भी आतंकवाद और धमकियों के प्रति असुरक्षित बने हुए हैं। इसमें उन समुदायों के लिए 26 अक्टूबर की ऐतिहासिक और संवैधानिक अहमियत को भी स्वीकार किया गया है, जो इस दिन को जम्मू-कश्मीर के भारतीय संघ में विलय के रूप में मनाते हैं।

 


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Content Writer

Tanuja

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