मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के क्लस्टर बम मिसाइलों से बढ़ी चिंता : रूस और चीन की भूमिका पर उठे सवाल

punjabkesari.in Wednesday, Mar 04, 2026 - 10:56 PM (IST)

इंटरनेशनल डेस्कः मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच बड़ी खबर सामने आई है। इजराइली सैन्य अधिकारियों ने दावा किया है कि ईरान ने इजराइल की ओर क्लस्टर बम (Cluster Munitions) से लैस बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। मौजूदा युद्ध में ऐसे हथियारों के इस्तेमाल की यह पहली रिपोर्ट बताई जा रही है।

क्लस्टर हथियार आधुनिक युद्ध के सबसे विवादित हथियारों में गिने जाते हैं। इनकी खासियत यह होती है कि ये एक बड़े विस्फोट की जगह हवा में फटकर दर्जनों छोटे-छोटे बमों (सबम्यूनिशन) को बड़े इलाके में फैला देते हैं। इजराइली रक्षा अधिकारियों का कहना है कि ईरान की कुछ क्लस्टर मिसाइलें हवा में 80 तक छोटे बम छोड़ सकती हैं, जो कई किलोमीटर के दायरे में तबाही फैला सकते हैं।

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हथियारों के आने से युद्ध की प्रकृति बदल जाती है। एक जगह पर एक बड़ा धमाका होने के बजाय कई छोटे-छोटे धमाके अलग-अलग जगहों पर होते हैं। इससे आम नागरिकों के लिए खतरा बढ़ जाता है और कई बार छोटे बम जमीन पर बिना फटे पड़े रह जाते हैं, जो लंबे समय तक जानलेवा साबित हो सकते हैं।

अब बहस सिर्फ सैन्य खतरे की नहीं है, बल्कि यह सवाल भी उठ रहा है कि ईरान ने यह तकनीक कैसे विकसित की। ऐसे देश में जहां उन्नत हथियार कार्यक्रमों से जुड़े वैज्ञानिकों की पहले कई बार हत्या हो चुकी है, वहां इतनी क्षमता का विकास कैसे हुआ? इजरायली विशेषज्ञों ने संकेत दिया है कि इसमें बाहरी मदद हो सकती है। इसी वजह से रूस या चीन से सैन्य तकनीक मिलने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।

तेल अवीव के पास हमला

इजराइली अधिकारियों के मुताबिक, हालिया हमलों के दौरान कम से कम एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल, जिसमें क्लस्टर बम लगे थे, मध्य इजराइल में गिरी। रिपोर्ट के अनुसार, मिसाइल का वारहेड जमीन से करीब चार मील (लगभग सात किलोमीटर) की ऊंचाई पर फटा और करीब 20 छोटे बम छोड़े। ये बम करीब पांच मील (लगभग आठ किलोमीटर) के दायरे में फैल गए। इनमें से एक बम तेल अवीव के दक्षिण में स्थित अज़ोर कस्बे में एक घर पर गिरा। इससे इमारत को नुकसान पहुंचा, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ। हालांकि अन्य इलाकों में हुए हमलों में लोग घायल हुए। तेल अवीव के पास गिरी एक क्लस्टर मिसाइल से कम से कम 12 लोग घायल हुए।

28 फरवरी से अब तक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमलों में इजराइल में कम से कम 11 लोगों की मौत और 1,000 से ज्यादा लोग अलग-अलग स्तर पर घायल हुए हैं। इजराइली सेना ने बिना फटे छोटे बमों के खतरे को लेकर जनता के लिए एक चेतावनी जारी की है।

इजराइली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा कि ईरान ने ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया है जिनका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा नागरिक नुकसान पहुंचाना है। उनके शब्दों में, “यह आतंकी शासन नागरिकों को नुकसान पहुंचाना चाहता है और व्यापक तबाही के लिए बड़े दायरे में फैलने वाले हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है।”

हमलों के पैटर्न में बदलाव

ईरान की मिसाइल कार्रवाई पूरे सप्ताह जारी रही, हालांकि हमलों की संख्या में उतार-चढ़ाव देखा गया। 3 मार्च को ईरान ने कम से कम छह मिसाइल बैराज दागे। इससे एक दिन पहले भी इतनी ही संख्या में हमले हुए थे। यह संख्या 28 फरवरी के मुकाबले काफी कम है, जब एक ही दिन में कम से कम 20 मिसाइल बैराज दर्ज किए गए थे। भले ही हमलों की संख्या कम हुई हो, लेकिन क्लस्टर वारहेड के इस्तेमाल से नई चुनौती खड़ी हो गई है। ये हथियार शहरी इलाकों में कई छोटे विस्फोट फैलाते हैं, जिससे इन्हें रोकना और नुकसान को सीमित करना ज्यादा कठिन हो जाता है। रक्षा अधिकारियों का मानना है कि शनिवार से अब तक ईरान कम से कम पांच क्लस्टर मिसाइलें इजराइल की घनी आबादी वाले इलाकों की ओर दाग चुका है।

क्लस्टर मिसाइल कैसे काम करती है?

सामान्य बैलिस्टिक मिसाइल में एक बड़ा वारहेड होता है, जिसका वजन 500 से 1,000 किलोग्राम तक हो सकता है। लेकिन क्लस्टर वारहेड अलग तरीके से काम करता है। मिसाइल हवा में खुलती है और कई छोटे बम गिराती है। हर छोटा बम लगभग सात किलोग्राम तक विस्फोटक लेकर चलता है, जो हमास या हिजबुल्लाह जैसे संगठनों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले छोटे रॉकेट की ताकत के बराबर हो सकता है। भले ही हर धमाका छोटा हो, लेकिन बड़े इलाके में फैलने की वजह से कुल नुकसान ज्यादा हो सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर मिसाइल को हवा में ही मार गिराया जाए, तो उसके छोटे बम अनियमित तरीके से नीचे गिर सकते हैं। कुछ तुरंत फट जाते हैं, जबकि कुछ बिना फटे जमीन पर पड़े रह जाते हैं। ये बाद में छेड़छाड़ होने पर फट सकते हैं और नागरिकों या बचाव दल के लिए खतरा बन सकते हैं।

क्लस्टर हथियारों का सबसे बड़ा खतरा यही है कि बड़ी संख्या में छोटे बम जमीन पर नहीं फटते और सालों तक लैंडमाइन की तरह सक्रिय रह सकते हैं।

पहले भी हुआ इस्तेमाल

इजराइली अधिकारियों का कहना है कि ईरान ने पिछले साल जून में दोनों देशों के बीच 12 दिन चले युद्ध में पहली बार क्लस्टर मिसाइलों का इस्तेमाल किया था। उस दौरान तीन क्लस्टर मिसाइलें इजराइल की ओर दागी गई थीं, जो सात अलग-अलग शहरों में गिरी थीं। मौजूदा युद्ध में इन हथियारों का यह दूसरा इस्तेमाल माना जा रहा है।

इजराइली सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के पास कम से कम तीन तरह की मिसाइलें हैं जो क्लस्टर वारहेड ले जा सकती हैं — ज़ोलफाघर (Zolfaghar), क़द्र (Qadr) सीरीज और खोर्रमशहर (Khorramshahr) मिसाइल। खोर्रमशहर को इनमें सबसे शक्तिशाली माना जाता है। ईरान का दावा है कि इसकी मारक क्षमता करीब 2,000 किलोमीटर है और यह 80 तक छोटे बम ले जा सकती है।

ईरान की क्लस्टर हथियार क्षमता

ईरान सार्वजनिक रूप से क्लस्टर बमों के उत्पादन पर चर्चा नहीं करता। लेकिन संकेत मिलते हैं कि वह बैलिस्टिक मिसाइलों और रॉकेट दोनों के लिए ऐसे हथियार बनाता है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, देश में बनी क़द्र-एस (Qadr S) मिसाइल में क्लस्टर वारहेड लगाया जा सकता है और इसकी रेंज करीब 2,000 किलोमीटर है। 2015 में ईरान ने फतेह मिसाइल का एक ऐसा मॉडल दिखाया था, जिसमें 30 छोटे बम लगे थे और हर एक का वजन करीब 20 पाउंड था।

कुछ विश्लेषणों के अनुसार, कियाम (Qiam) सीरीज की मिसाइल, जो सोवियत दौर की स्कड डिजाइन पर आधारित है, या बड़ी खोर्रमशहर मिसाइल भी क्लस्टर बम ले जा सकती है। ईरान 122 मिमी, 240 मिमी और 333 मिमी के कई प्रकार के बिना-मार्गदर्शित रॉकेट भी बनाता है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें क्लस्टर बम लगाए जा सकते हैं या नहीं।

विदेशी हथियार और अंतरराष्ट्रीय विवाद

ओपन-सोर्स खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के पास कुछ विदेशी क्लस्टर सिस्टम भी हैं, जैसे KMGU डिस्पेंसर, PROSAB-250 और ब्रिटेन में बने BL755 क्लस्टर बम। ईरान ने कभी सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया कि उसके भंडार में कितने और किस प्रकार के क्लस्टर हथियार हैं।

क्लस्टर हथियारों को लेकर दुनिया भर में विवाद है। 2008 में 100 से अधिक देशों ने “कन्वेंशन ऑन क्लस्टर म्यूनिशन” नामक अंतरराष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर किए, जिसमें ऐसे हथियारों के इस्तेमाल, उत्पादन और भंडारण पर रोक लगाई गई है। अब तक 111 देश और 12 अन्य इकाइयां इस संधि से जुड़ चुके हैं। लेकिन न तो इजराइल और न ही ईरान ने इस पर हस्ताक्षर किए हैं। अमेरिका भी इस संधि का हिस्सा नहीं है।

यह मुद्दा 2023 में फिर चर्चा में आया था, जब अमेरिका ने यूक्रेन को रूस के खिलाफ इस्तेमाल के लिए क्लस्टर हथियार दिए थे। यूक्रेन ने भी आरोप लगाया था कि रूस ने युद्ध के दौरान क्लस्टर हथियारों का इस्तेमाल किया।


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Content Writer

Pardeep

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