''जल्द पता चल जाएगा'': रियाद में US एम्बेसी पर ड्रोन हमले के बाद ट्रंप की सख्त चेतावनी, मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव

punjabkesari.in Tuesday, Mar 03, 2026 - 10:21 PM (IST)

इंटरनेशनल डेस्कः मिडिल ईस्ट में तेजी से बढ़ते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को बड़ा बयान दिया। सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले के बाद ट्रंप ने कहा — “जल्द पता चल जाएगा”, यानी जवाबी कार्रवाई जल्द होगी। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस बार “ग्राउंड पर सैनिक भेजना” (boots on the ground) जरूरी नहीं हो सकता।

6 अमेरिकी सैनिकों की मौत, जवाबी कार्रवाई तय

एक पत्रकार को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले और अमेरिकी सैनिकों की मौत का बदला लिया जाएगा। सोमवार तक इस संघर्ष में 6 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका चुप नहीं बैठेगा और उचित समय पर जवाब देगा।

“बूट्स ऑन द ग्राउंड” पर बदला अंदाज

ट्रंप का यह बयान उनके पहले दिए गए बयान से थोड़ा अलग माना जा रहा है। शनिवार को ईरान पर हमले शुरू करने के बाद उन्होंने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा था: “हर राष्ट्रपति कहता है कि ‘ग्राउंड पर सैनिक नहीं होंगे।’ मैं ऐसा नहीं कहता। मैं कहता हूं, ‘शायद जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन अगर जरूरत हुई तो भेजेंगे।’” अब उन्होंने कहा है कि संभव है कि जमीनी सैनिकों की जरूरत न पड़े, लेकिन विकल्प खुला है।

“अभी बड़ी लहर बाकी है”

ट्रंप ने चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिका को युद्धों से बाहर निकालने का वादा किया था। लेकिन मौजूदा हालात में उन्होंने कहा कि अमेरिका के पास अभी और ताकत बची है। उन्होंने न्यूयॉर्क पोस्ट से कहा: “अभी बड़ी लहर (big wave) आई ही नहीं है।” सोमवार को ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को तय 4–5 हफ्तों से भी ज्यादा समय तक चला सकता है। अब तक इस युद्ध में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत और ईरान में 555 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

अमेरिका के स्पष्ट लक्ष्य क्या हैं?

ट्रंप ने पहली बार खुले तौर पर अपने सैन्य अभियान के उद्देश्य बताए:

  • ईरान की मिसाइल क्षमता को खत्म करना

  • उसकी नौसेना को कमजोर करना

  • परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करना

  • क्षेत्र में सशस्त्र गुटों को मिलने वाला समर्थन रोकना

खामेनेई की मौत के बाद बढ़ा संघर्ष

शनिवार से अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान पर हमले कर रहे हैं। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो चुकी है। इसके जवाब में ईरान ने पूरे मिडिल ईस्ट में मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। ईरान ने साफ तौर पर वैश्विक ऊर्जा कीमतें बढ़ाने की धमकी दी है।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर सीधी धमकी

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के जनरल सरदार जब्बारी ने कहा: “जो भी जहाज हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश करेगा, हम उसे जला देंगे।” हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य बेहद अहम समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का लगभग 20% समुद्री तेल गुजरता है। अगर यह रास्ता बंद हुआ तो कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल, वैश्विक बाजारों में गिरावट और विश्व अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर हो सकता है।

मिडिल ईस्ट का एयरस्पेस बंद

लगातार हमलों के कारण मिडिल ईस्ट के अधिकांश देशों ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर गंभीर असर पड़ा है और हजारों यात्री फंसे हुए हैं।

अमेरिका युद्ध में कैसे शामिल हुआ?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका सीधे तब शामिल हुआ जब उसे पता चला कि उसका सहयोगी इजरायल ईरान पर हमला करने वाला है। रुबियो ने कहा: “हमें पता था कि अगर ईरान पर हमला हुआ, तो वह तुरंत हमें निशाना बनाएगा। इसलिए हमें पहले से तैयारी करनी पड़ी।”

चौथे दिन में पहुंचा संघर्ष, क्षेत्रीय युद्ध का खतरा

यह संघर्ष अब चौथे दिन में पहुंच चुका है। लगातार हमलों और जवाबी कार्रवाइयों से पूरा पश्चिम एशिया बड़े युद्ध की कगार पर खड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति नहीं संभली तो तेल संकट, वैश्विक बाजारों में भारी गिरावट और व्यापक आर्थिक अस्थिरता दुनिया भर में देखने को मिल सकती है।


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Content Writer

Pardeep

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